जबलपुर। अदालती आदेशों की लगातार अनदेखी और प्रशासनिक हठधर्मिता पर सख्त रुख अपनाते हुए मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विशाल धगट की एकलपीठ ने एक संविदा महिला कर्मचारी की याचिका स्वीकार करते हुए राज्य शिक्षा केंद्र के निदेशक हरजिंदर सिंह पर पचास हजार का व्यक्तिगत जुर्माना लगाया है। यह याचिका खंडवा में राजीव गांधी सर्व शिक्षा अभियान के तहत संविदा प्रोग्रामर के पद पर कार्यरत आयशा शेख द्वारा दायर की गई थी। उच्च न्यायालय में याचिकाकर्ता का पक्ष अधिवक्ता निखिल तिवारी ने रखा।
याचिकाकर्ता का मासूम बेटा ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी नामक एक दुर्लभ एवं गंभीर आनुवंशिक बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में बच्चे की शारीरिक क्षमता तेजी से कम होती जाती है और उसे निरंतर देखभाल एवं मां की उपस्थिति की अत्यंत आवश्यकता होती है। लंबा कानूनी संघर्ष। याचिकाकर्ता के अधिवक्ता श्री निखिल तिवारी ने कोर्ट के समक्ष तर्क दिया कि उच्च न्यायालय की विभिन्न पीठों तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संविदा महिला कर्मचारियों के चाइल्ड केयर लीव के अधिकार को स्पष्ट किए जाने के बावजूद, विभाग बार-बार मनमाने और अवमाननापूर्ण तरीके से आवेदन खारिज कर रहा था। संवैधानिक अधिकार। याचिका में रेखांकित किया गया कि मध्य प्रदेश सिविल सेवा छुट्टी नियम, 1977 के नियम 38-C और संविधान के अनुच्छेद 14 व 21 के तहत महिला संविदा कर्मचारियों को भी 730 दिनों तक का बाल देखभाल अवकाश पाने का पूरा अधिकार है।
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विशाल धगट ने कहा कि अदालतों द्वारा दिए गए कानूनी निर्णयों का पालन करना प्रशासनिक अधिकारियों के लिए अनिवार्य है। राज्य शिक्षा केंद्र के निदेशक ने बार-बार अदालत के स्पष्ट निर्देशों की अवहेलना की है और शासकीय परिपत्रों का हवाला देकर राहत देने से इंकार किया है, जो कि कानूनन गलत है। अदालत द्वारा जारी प्रमुख निर्देश। पहला, याचिकाकर्ता के छुट्टी आवेदन को निरस्त करने वाला 16.7.2026 का विवादित आदेश निरस्त कर दिया गया। दूसरा, संबंधित अधिकारियों को आदेश की प्रति मिलते ही याचिकाकर्ता आयशा शेख को चाइल्ड केयर लीव प्रदान करने का निर्देश दिया गया। तीसरा, राज्य शिक्षा केंद्र के निदेशक हरजिंदर सिंह पर पचास हजार की भारी कॉस्ट लगाई गई, जिसे तीस दिनों के भीतर रजिस्ट्रार जनरल, उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष जमा करना अनिवार्य होगा। चौथा, उच्च अधिकारियों को सूचना। इस आदेश की प्रति प्रमुख सचिव, उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश, तथा महाधिवक्ता कार्यालय को आवश्यक कार्रवाई हेतु भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
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