जबलपुर। आजादी के अमृत महोत्सव के पावन अवसर पर, देश भर में चल रहे "हर घर तिरंगा" अभियान के तहत त्रिभुवन दास मालपानी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, मिलौनीगंज, जबलपुर में देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता का एक अनुपम दृश्य देखने को मिला। विद्यालय परिवार द्वारा एक भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और खिलाड़ियों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया।
इस देशभक्तिपूर्ण आयोजन की मुख्य विशेषता यह रही कि इसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ, विद्यालय के क्रीड़ा प्रभारी तथा वरिष्ठ जूडो कोच आबिद हुसैन खान के कुशल मार्गदर्शन में विद्यालय परिसर में ही अभ्यास करने वाले जूडो खिलाड़ियों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खिलाड़ियों की ऊर्जा और उत्साह ने तिरंगा यात्रा के माहौल को और भी अधिक जोशपूर्ण बना दिया। यात्रा के दौरान, सभी के हाथों में लहराते राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति के नारों से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा।
विद्यालय के प्राचार्य श्री राजकुमार मिश्रा ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित किया। उन्होंने "हर घर तिरंगा" अभियान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा, "यह अभियान केवल एक ध्वज फहराने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह हमारे वीर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करने और राष्ट्र के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने का एक अवसर है। हमें अपने राष्ट्रीय ध्वज का हमेशा सम्मान करना चाहिए और देश की एकता व अखंडता के लिए काम करना चाहिए।" उन्होंने विद्यार्थियों को देश के जिम्मेदार नागरिक बनने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए भी प्रेरित किया।
तिरंगा यात्रा को सफल बनाने में विद्यालय के समस्त शिक्षकगणों ने अत्यंत सक्रिय और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने यात्रा का सुचारू संचालन सुनिश्चित किया और विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। इस अवसर पर विद्यालय के प्रतिष्ठित शिक्षकगणों की उपस्थिति और योगदान सराहनीय रहा।
त्रिभुवनदास मालपानी स्कूल द्वारा आयोजित यह तिरंगा यात्रा न केवल देशप्रेम की एक मिसाल बनी, बल्कि समुदाय के लिए भी एक प्रेरणा का स्रोत साबित हुई। यह आयोजन इस बात का प्रमाण है कि जब हम सब मिलकर राष्ट्र के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हैं, तो एक शक्तिशाली संदेश जाता है। "हर घर तिरंगा" अभियान इसी एकता और राष्ट्रवाद की भावना को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
तिरंगा यात्रा को सफल बनाने में सत्येंद्र दास गुरु, अनीता मिश्रा, सुधा तिवारी, कुसुम मसी, विवेक व्यास, आशीष नेमा, श्वेता गुप्ता तथा शैली साहू आदि शिक्षकों का सहयोग सराहनीय रहा।
