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डीजे की तेज धमक गर्भवती महिलाओं के लिए बन सकती है खतरा, विशेषज्ञों ने अत्यधिक शोर से बचने की दी सलाह

 


जबलपुर। शादियों, त्योहारों और अन्य आयोजनों में बजने वाले तेज डीजे का शोर केवल परेशानी या नींद में खलल का कारण नहीं है, बल्कि अत्यधिक ध्वनि के संपर्क को स्वास्थ्य पर पड़ने वाले गंभीर प्रभावों से भी जोड़ा गया है। खासतौर पर गर्भवती महिलाओं को बहुत तेज और लंबे समय तक चलने वाले शोर से बचने की सलाह दी जाती है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अत्यधिक पर्यावरणीय शोर का संबंध उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी जोखिम, नींद में व्यवधान, तनाव और प्रतिकूल जन्म परिणामों से पाया गया है। हालांकि किसी एक डीजे कार्यक्रम को सीधे गर्भस्थ शिशु को नुकसान का कारण मानना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं होगा; जोखिम शोर की तीव्रता, दूरी और संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है। 

85 डेसिबल से ऊपर का शोर लंबे समय तक हो तो सावधानी

CDC के अनुसार 85 डेसिबल या उससे अधिक शोर वयस्कों की सुनने की क्षमता के लिए हानिकारक हो सकता है। गर्भावस्था में बहुत तेज शोर शरीर के माध्यम से भ्रूण तक भी पहुंच सकता है। CDC बताता है कि भ्रूण के कान लगभग 20वें सप्ताह तक विकसित हो जाते हैं और करीब 24वें सप्ताह से वह ध्वनियों पर प्रतिक्रिया देना शुरू कर सकता है। 

ACOG भी बताता है कि गर्भावस्था के आगे के चरणों में तेज आवाज पर भ्रूण अचानक हरकत कर सकता है। 

गर्भवती महिलाओं में घबराहट और BP बढ़ने की आशंका

बहुत तेज शोर शरीर में तनाव प्रतिक्रिया पैदा कर सकता है। लगातार शोर के संपर्क को रक्तचाप और हृदय संबंधी प्रभावों से जोड़ा गया है। WHO के शोध में शोर से जुड़े तनाव तंत्र को हृदय और चयापचय संबंधी प्रभावों से जोड़ा गया है। 

ऐसे में पहले से उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी बीमारी या गर्भावस्था की जटिलताओं से जूझ रही महिलाओं के लिए अत्यधिक शोर वाले स्थानों से दूरी रखना अधिक सुरक्षित माना जाता है।

प्री-मैच्योर डिलीवरी और कम वजन पर भी शोध

WHO की गाइडलाइन में पर्यावरणीय शोर को प्रतिकूल जन्म परिणामों से जोड़ने वाले बढ़ते वैज्ञानिक प्रमाणों का उल्लेख किया गया है। हालांकि यह संबंध मुख्य रूप से लंबे समय तक पर्यावरणीय शोर के संपर्क पर आधारित अध्ययनों से सामने आया है और हर व्यक्तिगत मामले में सीधे कारण-परिणाम साबित नहीं करता। 

स्थानीय मामलों ने भी बढ़ाई चिंता

जबलपुर में भी चिकित्सकों के पास ऐसे मामले आने की बात कही जा रही है, जिनमें तेज डीजे के बाद गर्भवती महिलाओं को घबराहट, तेज धड़कन या बढ़े हुए रक्तचाप की शिकायत हुई। मानेगांव और अधारताल से जुड़े दो मामलों में महिलाओं को तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की जरूरत पड़ी।

इन व्यक्तिगत मामलों में डीजे को प्रत्यक्ष चिकित्सकीय कारण मानना जांच के बिना उचित नहीं होगा, लेकिन ऐसी घटनाएं तेज शोर के प्रति सावधानी की जरूरत जरूर रेखांकित करती हैं।

विशेषज्ञों की सलाह

गर्भवती महिलाओं को बहुत तेज डीजे, लाउडस्पीकर या अन्य उच्च ध्वनि स्रोतों के बिल्कुल पास खड़े होने से बचना चाहिए। यदि तेज शोर के बाद अचानक घबराहट, सीने में दर्द, चक्कर, असामान्य धड़कन या गर्भ में बच्चे की गतिविधि को लेकर चिंता हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

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