जबलपुर। शहर में तेज आवाज वाले डीजे पर सख्ती बढ़ाने और जबलपुर को ‘नो डीजे सिटी’ घोषित करने की मांग को लेकर नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच सहित विभिन्न सामाजिक एवं वरिष्ठ नागरिक संगठनों ने मंगलवार को पुलिस अधीक्षक कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया और एसपी को ज्ञापन सौंपा।
संगठनों ने ज्ञापन में नागपुर में डीजे को लेकर की गई सख्ती का हवाला देते हुए जबलपुर में भी इसी तरह की व्यवस्था लागू करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि शादियों, धार्मिक आयोजनों और अन्य कार्यक्रमों में अत्यधिक तेज आवाज में बजने वाले डीजे से आम नागरिकों, बुजुर्गों, हृदय रोगियों और गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है।
तेज शोर के स्वास्थ्य प्रभावों पर जताई चिंता
नागरिक संगठनों ने कहा कि अत्यधिक ध्वनि प्रदूषण से बेचैनी, नींद में व्यवधान, रक्तचाप बढ़ने और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों पर भी तेज शोर के संभावित प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई।
हालांकि किसी व्यक्ति में हार्ट अटैक या गर्भस्थ शिशु को हुए नुकसान का सीधा कारण केवल डीजे का शोर है या नहीं, यह चिकित्सकीय जांच से ही निर्धारित किया जा सकता है।
कठोर कानूनी कार्रवाई की मांग
ज्ञापन में संगठनों ने मांग की कि निर्धारित सीमा से अधिक तेज आवाज में डीजे बजाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। कुछ प्रतिनिधियों ने अत्यधिक शोर से जान को खतरा पैदा करने वाली परिस्थितियों में गंभीर आपराधिक धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग भी रखी।
किस मामले में कौन-सी कानूनी धारा लागू होगी, इसका निर्धारण घटना की परिस्थितियों, उपलब्ध साक्ष्यों और कानून के अनुसार पुलिस एवं न्यायिक प्रक्रिया से होगा।
कई संगठनों ने मिलकर किया प्रदर्शन
प्रदर्शन में नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच, भारतीय वरिष्ठ नागरिक एसोसिएशन, सीनियर सिटीजन वेलफेयर संघ, महिला समिति और पेंशनर्स समाज सहित अन्य संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
इस दौरान डॉ. पी.जी. नाजपांडे, टी.के. रायघटक, एड. वेदप्रकाश अधौलिया, सुभाष चन्द्रा, सुशीला कनौजिया, संतोष श्रीवास्तव, मनीष शर्मा, पी.एस. राजपूत, अशोक यादव, श्याम सोलंकी, के.सी. सोनी, घनश्याम सोनकर, एड. व्रजेश साहू, प्रफल्ल सक्सेना, व्ही.एन. कमलाकर, दिलीप कुण्डे और राममिलन शर्मा सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
