ग्यारहवीं शरीफ के आखिरी उर्स मेले में हजारों जायरीन पहुंचे, चादर-निशान पेश कर मांगी अमन-खुशहाली की दुआ
जबलपुर। मदन महल पहाड़ी जुमेरात को अकीदत के रंग में रंगी नजर आई। हजरत पीराने पीर गौस-ए-आजम की दरगाह शरीफ में ग्यारहवीं शरीफ के आखिरी उर्स मेले में शहर ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से हजारों की संख्या में जायरीन पहुंचे। सुबह से देर रात तक दरगाह शरीफ की ओर जाने वाले रास्तें पर जायरीन की भीड़ नजर आई। अकीदतमंदों ने चादर और निशान पेश कर नजर-ओ-नियाज पेश की और लंगर तकसीम किया।
नमाज-ए-फज्र के बाद से ही जायरीन की आमद शुरू हो गई थी। दोपहर बाद दरगाह शरीफ में भीड़ का सिलसिला और बढ़ गया। मदन महल पहाड़ी क्षेत्र “या गौस अल मदद” की सदाओं से गूंजता रहा। सूपाताल कब्रिस्तान से दरगाह शरीफ तक करीब एक किलोमीटर के रास्ते पर दिनभर जायरीन की आवाजाही बनी रही।
शहनाई और बैंड पर गूंजती नातिया धुनों के बीच सैकड़ों चादरें और निशान दरगाह शरीफ पर पेश किए गए। मुस्लिम समाज के साथ अन्य धर्मों के लोगों ने भी चादर और निशान पेश कर आपसी सद्भाव की मिसाल पेश की। 11 और 21 मीटर लंबी चादरों के साथ 31 और 51 फुट ऊंचे निशान भी आकर्षण का केंद्र रहे।
दरगाह परिसर में बाबाओं पर हाल की आमद भी हुई। उनके आसपास मुरीदों और अकीदतमंदों की भीड़ लगी रही। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने बच्चों के साथ दरगाह पहुंचीं। उर्स मेले में लगे खान-पान के स्टॉल और बच्चों के झूले भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे।
सूफी संत सम्मेलन में गूंजा मोहब्बत और भाईचारे का पैगाम
उर्स मेले के दौरान अपराह्न जलसागाह में सूफी संत सम्मेलन का आयोजन किया गया। मुतवल्ली सैय्यद कादिर अली कादरी की सरपरस्ती, सूफी मुबारक कादरी की सदारत और सज्जादानशीन खलीफा इनायत कादरी की निजामत में “बज्म-ए-सूफिया” का आयोजन हुआ।
सम्मेलन में कादरी, चिश्ती, निजामी, साबरी, मदारी, न्याजी, रजवी, वारसी, सुल्तानी, बुर्हानी, अशरफी, रब्बानी और बंदानवाजी सहित विभिन्न सूफी सिलसिलों के बुजुर्गों ने शिरकत की। इनमें मुख्य रूप से गुड्डू बाबा, अरुण महाराज (वृंदावन), प्रकाश बाबा, सूफ़ी असर चिश्ती साबरी, संजय रजक, हकीम बाबा, शाहनवाज अहमद, सफीक बाबा (नरसिंहपुर), राजेंद्र कोरी सहित अन्य शामिल रहे।
सूफी संतों ने इंसानियत, मोहब्बत, आपसी सम्मान और भाईचारे को समाज की मजबूती का आधार बताया। उन्होंने लोगों को एक-दूसरे के करीब आने और आपसी सद्भाव को मजबूत करने का संदेश दिया। इस अवसर पर सज्जादानशीन निजाम कादरी ने मुल्क में अमन, खुशहाली और तरक्की के लिए दुआ की।
दरगाह के खादिमान जुल्फिकार अली, निजाम कादरी, बासित कादरी, मंसूर अली, याकूब अली शाह, जवाहर कादरी, अफजल कादरी, अमान कादरी और राज कादरी ने सूफी हजरात की दस्तारबंदी कर इस्तकबाल किया। वहीं आफताब अली कादरी, राहत अली, सलामत अली, आबिद अली, मुहम्मद अली, असगर कादरी, इदरीस कादरी, आशु कादरी और जलील शाह ने तबर्रुक पेश किया। मगरिब की नमाज के बाद सलातो-सलाम पेश किया गया।
आज जुमे की नमाज के बाद कुल शरीफ
ग्यारहवीं शरीफ के सिलसिले में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद दरगाह शरीफ में कुल शरीफ का आयोजन किया जाएगा। इसमें दूर-दराज से आए सूफी हजरात की दस्तारबंदी कर विदाई दी जाएगी।
लंगर-ए-गौसिया आज
कुल शरीफ के मौके पर हसनी हुसैनी सोसायटी जबलपुर के तत्वावधान में लंगर-ए-गौसिया का आयोजन किया जाएगा। दरगाह पर आने वाले जायरीन और अकीदतमंदों के लिए लंगर की व्यवस्था रहेगी।
प्रदेश अध्यक्ष मोहम्मद सोहेल, सचिव शेख राजिक और जिला अध्यक्ष समीर बाबा ने अकीदतमंदों से अधिक से अधिक संख्या में शिरकत कर लंगर में शामिल होने की अपील की है।
