बालाघाट। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी गुरुवार को बालाघाट जिले के बिरसा ब्लॉक स्थित जगला गांव पहुंचे और हाल के महीनों में बच्चों को खोने वाले आदिवासी परिवारों से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों से उनकी समस्याएं सुनीं और बाद में मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, रोजगार और भूमि अधिकार से जुड़े मुद्दों को वे लोकसभा में उठाएंगे।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि बीमारी और कुपोषण से बच्चों की मौत के पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी और सरकारी व्यवस्था की विफलता जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि प्रभावित गांवों में स्कूल, अस्पताल और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति चिंताजनक है। बच्चों की मौत के कारणों को लेकर हालांकि विभिन्न चिकित्सकीय कारक सामने आए हैं और सरकारी आंकड़ों तथा कांग्रेस के दावों में संख्या को लेकर अंतर भी है। जमीन के पट्टे और वन अधिकार का मुद्दा उठाया
राहुल गांधी ने प्रभावित आदिवासी परिवारों को जमीन के पट्टे दिए जाने की मांग की। उन्होंने मनरेगा, वन अधिकार कानून और भूमि अधिकार से जुड़े मामलों का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि आदिवासी परिवारों को इन योजनाओं और अधिकारों का पूरा लाभ नहीं मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को बेहतर अस्पताल, स्कूल और रोजगार की सुविधाएं मिलनी चाहिए तथा सरकार को अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करना चाहिए।
मुआवजे को लेकर भी उठाया सवाल
राहुल गांधी ने प्रभावित परिवारों को मुआवजा नहीं मिलने का आरोप भी लगाया। हालांकि एक रिपोर्ट के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार ने प्रभावित परिवारों के लिए दो-दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता की घोषणा की थी; वास्तविक भुगतान की स्थिति सभी परिवारों के मामले में अलग-अलग हो सकती है।
‘विकास’ के दावों पर सरकार को घेरा
मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों पर आदिवासी क्षेत्रों की उपेक्षा और भ्रष्टाचार के आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि विकास के दावों के बावजूद कई आदिवासी गांवों में बुनियादी सुविधाएं नहीं पहुंची हैं। ये आरोप कांग्रेस नेता की राजनीतिक आलोचना के रूप में सामने आए हैं।
राहुल गांधी ने कहा कि कांग्रेस आदिवासी समुदाय से जुड़े स्वास्थ्य, शिक्षा, जमीन और अधिकारों के मुद्दों को आगे भी उठाती रहेगी। उन्होंने प्रभावित परिवारों को सहयोग का भरोसा भी दिलाया।
