जबलपुर। करीब 15 साल पुराने मारपीट मामले में दशम अपर सत्र न्यायाधीश संजोग सिंह वाघेला की अदालत ने निचली अदालत का दोषमुक्ति आदेश पलट दिया। अदालत ने इसरार उर्फ आदिल अंसारी, मुबीन अहमद अंसारी, मोहम्मद फिरोज अंसारी और मोहम्मद आजाद अंसारी को दोषी ठहराते हुए अधिकतम एक वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रुचि गोयल द्वारा 14 अगस्त 2023 को दिए गए बरी करने के आदेश के विरुद्ध शासन और 70 वर्षीय फरियादी शफीक अहमद चौधरी, निवासी मंडी मदार टेकरी, ने आपराधिक अपील क्रमांक 364/2023 और 273/2023 दायर की थी।
फैसला सुनाए जाने के बाद अदालत ने चारों दोषियों की जमानत निरस्त कर उन्हें केंद्रीय जेल जबलपुर भेज दिया।
2011 की घटना, सट्टेबाजी का विरोध बना विवाद की वजह
प्रकरण 6 मई 2011 की शाम करीब 5:15 बजे का है। अभियोजन के अनुसार छोटी मदार टेकरी निवासी आरोपी फरियादी के घर के चबूतरे पर बैठकर क्रिकेट का सट्टा खेल रहे थे।
जब उन्हें वहां से हटने के लिए कहा गया तो वे कथित रूप से लाठी और बेसबॉल के डंडे लेकर मकान के अंदर घुस गए और शफीक अहमद, जुल्फिकार अली और साजिद अली के साथ मारपीट की।
हमले में जुल्फिकार को सिर, कलाई और नाक में गंभीर चोटें आईं और हड्डियां टूटने की बात मेडिकल रिकॉर्ड में सामने आई।
हनुमानताल थाने में दर्ज हुआ था मामला
घटना के बाद हनुमानताल पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 452, 294, 323, 325, 506 भाग-2 और 34 के तहत मामला दर्ज किया था।
निचली अदालत ने बाद में आरोपियों को बरी कर दिया था, जिसके खिलाफ राज्य शासन और फरियादी ने अपील दायर की।
मेडिकल रिपोर्ट और गवाहों पर अदालत ने किया भरोसा
अपीलीय अदालत ने डॉक्टर की मुलाहिजा रिपोर्ट, फरियादी और स्वतंत्र गवाहों के बयानों को विश्वसनीय माना। अदालत ने पाया कि अभियोजन घर में अनधिकृत प्रवेश और गंभीर चोट पहुंचाने के आरोप साबित करने में सफल रहा।
हालांकि धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी का आरोप सिद्ध नहीं हुआ।
पीड़ितों को मिलेगा प्रतिकर
अदालत ने अर्थदंड की राशि में से गंभीर रूप से घायल जुल्फिकार अली को 2 हजार रुपये तथा शफीक अहमद और साजिद अली को 1-1 हजार रुपये प्रतिकर के रूप में देने के निर्देश दिए।
प्रकरण में अपीलार्थी की ओर से अधिवक्ता मोहम्मद फिरोज अंसारी और शासन की ओर से एजीपी कुमारी सरोज तिवारी ने पैरवी की।
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