जबलपुर | डॉ महेंद्र सिंह सिकरवार जो 2024 में इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजी), रीवा के पद से सेवानिवृत्त हुए उनके विरुद्ध अप्रैल 2026 मे पुलिस अधीक्षक (एस पी), रीवा के द्वारा 11,61,885/- रुपए की वसूली निकाली गई एवं आदेशित किया गया कि यदि वे उक्त राशि को जमा नहीं करते तो उनके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी और वसूली हेतु पेंशन से राशि काट ली जाएगी |
डॉ महेंद्र सिंह सिकरवार को उक्त राशि वर्ष 2012 से उनके वेतन निर्धारण के संबंध में दी गई थी, जबकि उनसे कनिष्ठ आईपीएस अधिकारी जिनका वेतन निर्धारण श्री सिकरवार के वेतन निर्धारण के अनुकूल नहीं था एवं उन्हे अधिक वेतन प्रदाय किया जा रहा था, श्री सिकरवार के द्वारा उक्त विषय में अपने नियोक्ता को अभ्यावेदन देकर यह मांग की गई थी कि उनका वेतन निर्धारण संतुल्य किया जाए जिसके फलस्वरूप वर्ष 2012 से उनका वेतन निर्धारण किया गया था एवं पूर्व की प्रदाय की जाने वाली राशि का एरियर्स भी प्रदाय किया गया था | श्री सिकरवार इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस (आईजी), रीवा के पद से सेवानिवृत्त होते हुए एक आई पी एस अधिकारी थे जिनके नियोक्ता भारत सरकार, गृह विभाग एवं कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) है न कि मध्य प्रदेश शासन या पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक द्वारा अपने अधिकारों से आगे बढ़ते हुए श्री सिकरवार के विरुद्ध ऐसे आदेश जारी किए गए जो कानून के विरुद्ध है |
डॉ महेंद्र सिंह सिकरवार द्वारा केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर के समक्ष याचिका प्रस्तुत करते हुए यह मांग की गई कि उनके विरुद्ध की जा रही वसूली को रोका जाए क्योंकि वे एक सेवानिवृत्त अधिकारी है जिनसे इस प्रकार वसूली नहीं की जा सकती जबकि उन्होंने किसी भी प्रकार की कोई गलत जानकारी दी हो, पुलिस अधीक्षक के पत्र में ऐसे कोई अंश नहीं है कि श्री सिकरवार के द्वारा कोई गलत जानकारी देने के फलस्वरूप वेतन विसंगति में सुधार कराया हो | केन्द्रीय प्रशासनिक अधिकरण द्वारा आज दिनांक 04.08.2026 को श्री महेंद्र सिंह सिकरवार की याचिका पर सुनवाई करते हुए उनके विरुद्ध की जा रही वसूली पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है एवं भारत सरकार, एस पी, रीवा, मध्य प्रदेश शासन से जवाब मांगा है | याचिकाकर्ता श्री सिकरवार की ओर से अधिवक्ता श्री पंकज दुबे, सुश्री सोनाली पांडे एवं प्रथमेश पगारे पक्ष रख रहे है |
