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किछौछा शरीफ़ का मरकज़ी उर्स अक़ीदत-ओ-मोहब्बत के रूहानी रंग में मुकम्मल, मुल्क की सलामती और अमन के लिए उठे दुआ के हाथ

किछौछा शरीफ़ (अम्बेडकर नगर, उत्तर प्रदेश)।

दरगाहों की सरज़मीं किछौछा शरीफ़ एक बार फिर ज़िक्र-ए-इलाही, इश्क़-ए-रसूल और औलिया-ए-किराम की तालीमात की नूरानी किरणों से जगमगा उठी। आस्ताना आलिया अमीर-ए-मिल्लत, अमीरगंज में 16 व 17 जुलाई 2026 को दो रोज़ा मरकज़ी उर्स मुबारक पूरे अदब, अक़ीदत और सूफ़ियाना शानो-शौकत के साथ अंजाम पाया। इस मुबारक मौक़े पर हुज़ूर अमीर-ए-मिल्लत हज़रत सैयद शाह अमीर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 32वाँ, हुज़ूर बाबा-ए-मिल्लत हज़रत सैयद शाह तनवीर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 12वाँ और हुज़ूर सूफ़ी-ए-हिन्द हज़रत सैयद शाह गुल अख़्तर अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी रहमतुल्लाहि अलैह का 6वाँ उर्स मुबारक इंतिहाई रूहानी माहौल में मनाया गया।



यह मुबारक इज्तिमा हुज़ूर फ़ाज़िले बग़दाद हज़रत अल्लामा मौलाना सैयद हसन अस्करी अशरफ़ इब्ने अरबी अशरफ़ अशरफ़ियुल जिलानी की सरपरस्ती और हज़रत सूफ़ी फ़ारूख साहब की क़ियादत में अंजाम पाया। उर्स का आग़ाज़ परचम-कुशाई से हुआ, जिसके साथ ही फ़िज़ा में तराना-ए-अक़ीदत और दरूदो-सलाम की सदाएँ गूँज उठीं। हल्क़ा-ए-ज़िक्र, महफ़िल-ए-नात, मनक़बत और वाज़-ओ-नसीहत की महफ़िलों ने आशिक़ान-ए-औलिया के दिलों को रूहानी सुकून से सरशार कर दिया।

मुल्क के मुख़्तलिफ़ सूबों से तशरीफ़ लाए उलेमा-ए-किराम, मशाइख़, हफ़्फ़ाज़, नातख़्वाँ, मुरीदीन और ज़ायरीन ने औलिया-ए-किराम की बारगाह में हाज़िरी देकर अपनी मोहब्बत और अक़ीदत का नज़राना पेश किया। दूसरे रोज़ नमाज़-ए-फ़ज्र के बाद क़ुरआन-ख़्वानी हुई, जिसके बाद ख़ानक़ाह-ए-हुज़ूर अमीर-ए-मिल्लत से जुलूस-ए-संदल व चादर पूरे रिवायती अंदाज़ में रवाना हुआ। रास्ते भर गुलपोशी, नात-ओ-मनक़बत और दरूदो-सलाम की सदाओं ने माहौल को इश्क़-ए-मुस्तफ़ा ﷺ की ख़ुशबू से महका दिया।

आस्ताना आलिया पहुँचकर सज्जादानशीन हज़रत सैयद हसन अस्करी अशरफ़ साहब ने ख़ास दुआ फ़रमाई और बारगाह-ए-इलाही में मुल्क की तरक़्क़ी, अमन-ओ-अमान, खुशहाली, इंसानियत की भलाई, आपसी इत्तेहाद और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा की सलामती की दुआएँ माँगीं। हाज़िरीन ने पूरे ख़ुलूस और अदब के साथ "आमीन" कहकर इस दुआ में शिरकत की।



नमाज़-ए-जुमा के बाद लंगर-ए-आम का एहतिमाम किया गया, जहाँ हज़ारों ज़ायरीन ने बिना किसी तफ़रीक़ के तबर्रुक हासिल किया। नमाज़-ए-असर के बाद ज़ियारत-ए-मू-ए-मुबारक और दूसरे मुक़द्दस तबर्रुकात की ज़ियारत कराई गई, जिससे अकीदतमंदों के दिलों में रूहानी कैफ़ियत और इश्क़-ए-औलिया का जज़्बा और ताज़ा हो गया।

रात नमाज़-ए-इशा के बाद आख़िरी कुल शरीफ़ की रस्म अदा की गई। इसके बाद महफ़िल-ए-सिमा में सूफ़ियाना कलाम और मनक़बतों की ऐसी पुरकैफ़ गूँज सुनाई दी कि पूरी फ़िज़ा ज़िक्र-ए-ख़ुदा, इश्क़-ए-रसूल ﷺ और औलिया-ए-किराम की याद से महक उठी। हर चेहरा मोहब्बत, अदब और रूहानियत की रौशनी में डूबा हुआ नज़र आया।

उर्स कमेटी ने मुल्क और बैरून-ए-मुल्क से तशरीफ़ लाने वाले तमाम मुरीदीन, मुतअक़िदीन, मुहिब्बीन, ज़ायरीन, उलेमा-ए-किराम, मेहमानों, प्रशासन, पुलिस, ख़िदमतगारों और तमाम तआवुन करने वालों का दिली इस्तक़बाल करते हुए उनका शुक्रिया अदा किया। कमेटी ने कहा कि यह मुबारक इज्तिमा सूफ़ियाना तहज़ीब, ख़ानक़ाही रिवायत, मोहब्बत, ख़िदमत और इंसानियत की बेहतरीन मिसाल बनकर सामने आया।

मीडिया प्रभारी मो. अशफ़ाक आरिफ़ ने अपने पैग़ाम में कहा कि औलिया-ए-किराम की तालीमात इंसानियत, मोहब्बत, भाईचारे, सब्र, ख़िदमत और अमन का वह पैग़ाम हैं जिसकी आज पूरी दुनिया को सख़्त ज़रूरत है। अगर समाज इन रूहानी तालीमात को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बना ले, तो नफ़रत की जगह मोहब्बत, तफ़रक़े की जगह इत्तेहाद और बेचेनी की जगह अमन-ओ-सुकून का दौर क़ायम हो सकता है।
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