देश, प्रदेश, जिला, संभाग, तहसील, जिला और ग्राम स्तर पर संवाददाता चाहिए — संपर्क करें  |  डायरेक्टर, एडिटर इन चीफमोहम्मद असफाक आरिफ  |  शॉप - 1 दारुल उलूम मार्किट, मंडी मदार टेकरी, जबलपुर मध्य प्रदेश 482002  |  संपर्क: 9893230986

साइबर जांच में पूरे बैंक खाते को फ्रीज नहीं कर सकती पुलिस, हाईकोर्ट ने जारी किए अहम निर्देश



जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खाते फ्रीज करने की प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जांच एजेंसियां बिना पर्याप्त कारण पूरे बैंक खाते को फ्रीज न करें। अदालत ने कहा कि जहां तक संभव हो, केवल विवादित राशि पर ही लियन (Lien) या डेबिट फ्रीज लगाया जाए। पूरे खाते को फ्रीज करना केवल असाधारण परिस्थितियों में ही उचित होगा।

यह आदेश जस्टिस हिमांशु जोशी की एकलपीठ ने भोपाल निवासी और नरसिंहपुर जिले की सात कम्पोजिट शराब दुकानों की लाइसेंसधारी अर्चना शिवहरे की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।

980 रुपए के ट्रांजेक्शन पर 2.51 करोड़ का खाता हुआ फ्रीज

मामले के अनुसार, अप्रैल 2026 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इटारसी शाखा ने अर्चना शिवहरे का चालू बैंक खाता बिना पूर्व सूचना के फ्रीज कर दिया था। बाद में उन्हें जानकारी मिली कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) 2023 की धारा-106 के तहत दर्ज एक साइबर अपराध की शिकायत के आधार पर यह कार्रवाई की गई है।

याचिका के अनुसार, संदिग्ध साइबर ट्रांजेक्शन की राशि मात्र 980 रुपए थी, जबकि खाते में ₹2,51,72,192.57 जमा थे। इसी खाते से नरसिंहपुर जिले की सातों कम्पोजिट शराब दुकानों का पूरा वित्तीय संचालन किया जाता है।

हाईकोर्ट ने कहाकेवल विवादित राशि पर लगाएं रोक

याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता ऐश्वर्य साहू ने अदालत को बताया कि जांच के लिए यदि आवश्यक हो तो केवल 980 रुपए की राशि पर रोक लगाई जाए, लेकिन पूरे खाते को फ्रीज करने से व्यवसाय पूरी तरह प्रभावित हो गया है।

दलीलों पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसियों को कथित अपराध से जुड़ी राशि और खाते में उपलब्ध वैध धनराशि के बीच स्पष्ट अंतर करना चाहिए। केवल उतनी ही रकम पर रोक लगाई जानी चाहिए, जितनी जांच के लिए आवश्यक हो।

प्रदेशभर के लिए बनेगा मार्गदर्शक फैसला

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पूरे बैंक खाते को फ्रीज करना एक असाधारण कदम है और इसे सामान्य प्रक्रिया नहीं बनाया जा सकता। यदि संदिग्ध लेन-देन सीमित राशि का है, तो पूरे खाते पर प्रतिबंध लगाना न्यायसंगत नहीं माना जा सकता।

माना जा रहा है कि हाईकोर्ट का यह फैसला भविष्य में साइबर अपराधों की जांच के दौरान बैंक खातों को फ्रीज करने की प्रक्रिया के लिए प्रदेशभर में एक महत्वपूर्ण न्यायिक मार्गदर्शक साबित होगा।

Post a Comment

Previous Post Next Post
askari times
askari times