जबलपुर / भारत में शिक्षा और सार्वजनिक भर्ती परीक्षा प्रणाली को लेकर उपजा असंतोष अब एक व्यापक सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन का रूप ले चुका है। पिछले लगभग एक महीने से हजारों छात्र-छात्राएं और युवा शांतिपूर्ण ढंग से आंदोलन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली में गहराते संकट के लिए जवाबदेही तय की जाए तथा परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बहाल की जाए। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा नें बताया की पिछले एक दशक में देशभर में केंद्रीय और राज्य स्तरीय परीक्षाओं के 90 से अधिक पेपर लीक होने के मामले सामने आए हैं, जिनसे लगभग 7.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए हैं। इनमें नीट-यूजी, यूजीसी-नेट, एसएससी तथा विभिन्न राज्यों की पुलिस और शिक्षक भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। भारत की 15 से 29 वर्ष आयु वर्ग की लगभग 34.5 से 37.1 करोड़ युवा आबादी, जो देश की कुल जनसंख्या का लगभग 27 प्रतिशत है, इस व्यवस्था से प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में यह आंदोलन देशव्यापी छात्र-युवा अभियान का रूप लेकर विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों को भी अपने साथ जोड़ सकता है। इससे संसद, न्यायपालिका और सरकार पर संस्थागत सुधारों का दबाव बढ़ने की संभावना है।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी संकट का सबसे प्रभावी समाधान संवाद, पारदर्शिता और जवाबदेही है। इसलिए आने वाले समय में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत, विश्वास बहाली और शिक्षा सुधारों पर ठोस पहल ही यह तय करेगी कि यह संघर्ष टकराव की दिशा में बढ़ता है या फिर भारतीय शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक परिवर्तन का आधार बनता है।
