जबलपुर। रेल यात्रियों को निशाना बनाकर चलती ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम देने वाले एक कथित शातिर चोर को जीआरपी जबलपुर ने गिरफ्तार कर उसके कब्जे एवं निशानदेही पर ₹3,52,420 मूल्य के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए हैं। मामले में जांच के दौरान चोरी का माल खरीदने वाले कटनी के एक ज्वैलर्स की भूमिका भी सामने आई है, जिसके विरुद्ध पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई की है।
जीआरपी थाना जबलपुर में दर्ज अपराध क्रमांक 245/26 एवं 247/26 के तहत धारा 305(सी) भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के अंतर्गत कार्रवाई करते हुए पुलिस ने राजा निषाद (52 वर्ष) निवासी जगदेव का अखाड़ा, चित्रकूट (उत्तर प्रदेश), हाल निवासी खिरहनी फाटक, कटनी को गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार आरोपी को 21 जुलाई 2026 को जबलपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर इटारसी छोर से संदिग्ध अवस्था में पकड़ा गया।
पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि वह पिछले ढाई से तीन महीनों के दौरान भुसावल-कटनी एवं कटनी-भुसावल पैसेंजर ट्रेनों में यात्रियों के सामान और आभूषण चोरी करने की वारदातों को अंजाम देता रहा। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने एक सोने का हार, तीन सोने की नाक की लोंग, एक सोने की नथ, एक मंगलसूत्र, 12 सोने की गुरिया, दो जेंट्स सोने की अंगूठियां तथा एक जोड़ी चांदी की पायल बरामद की। बरामद आभूषणों की कुल कीमत ₹3,52,420 आंकी गई है।
कटनी के ज्वैलर्स तक पहुंची जांच
जांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि चोरी के कुछ आभूषण कटनी के गोल बाजार स्थित मुस्कान ज्वैलर्स में बेचे गए थे। आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने ज्वैलर्स संचालक विकास सोनी के कब्जे से दो सोने की अंगूठियां और एक जोड़ी चांदी की पायल बरामद की। पुलिस ने उनके विरुद्ध बीएनएस की धारा 317(2) के तहत वैधानिक कार्रवाई की है। अब जांच इस बात पर केंद्रित है कि चोरी का माल खरीदने के दौरान निर्धारित कानूनी प्रक्रिया और आवश्यक सत्यापन का पालन किया गया था या नहीं।
विशेष अभियान के दौरान मिली सफलता
रेल पुलिस अधीक्षक सुंदर सिंह कनेश के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक अंकिता सुल्या के मार्गदर्शन में चलाए जा रहे विशेष अभियान के दौरान जीआरपी को यह महत्वपूर्ण सफलता मिली। आरोपी को न्यायालय में पेश कर आगे की कानूनी कार्रवाई की गई है।
इस कार्रवाई में थाना प्रभारी संजीवनी राजपूत, उपनिरीक्षक गोपाल सिंह राजपूत, प्रधान आरक्षक सतेन्द्र सिंह, अरुण तिवारी, मनोज मिश्रा, रविकांत रजक, गोपाल, उमेश चौरे तथा आरआईबी के प्रधान आरक्षक हर्ष स्वरूप शर्मा की अहम भूमिका रही। उत्कृष्ट कार्य के लिए रेल पुलिस अधीक्षक ने पूरी टीम को नकद पुरस्कार देने की घोषणा की है।
रेल सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
जीआरपी की यह कार्रवाई निश्चित रूप से बड़ी सफलता मानी जा रही है, लेकिन इसके साथ ही यह मामला रेल यात्रियों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। यदि आरोपी लंबे समय से ट्रेनों में चोरी की वारदातों को अंजाम दे रहा था और चोरी का माल आसानी से बाजार तक पहुंच रहा था, तो यह संकेत है कि ऐसे नेटवर्क की जड़ें कहीं अधिक गहरी हो सकती हैं। अब जांच एजेंसियों की नजर केवल आरोपी तक सीमित नहीं, बल्कि चोरी के माल की खरीद-फरोख्त से जुड़े पूरे नेटवर्क पर भी है।

