भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार एक बार फिर बाजार से 3 हजार करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। यह राशि तीन हिस्सों में एक-एक हजार करोड़ रुपये के रूप में जुटाई जानी है। सरकार का कहना है कि ऋण का उपयोग वेतन, पेंशन या नियमित प्रशासनिक खर्च के बजाय पूंजीगत परिसंपत्तियों और विकास कार्यों के लिए किया जाएगा।
कर्ज के इस फैसले पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार को घेरा है। उन्होंने सवाल किया कि यदि लगातार कर्ज लेकर पूंजीगत खर्च किया जा रहा है, तो उसका असर विकास की गति और रोजगार के अवसरों में स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई दे रहा। पटवारी ने सोशल मीडिया पर सरकार की उधारी नीति को लेकर भी तीखी टिप्पणी की।
पटवारी ने बढ़ते कर्ज पर उठाए सवाल
पटवारी का आरोप है कि सरकार हर बार नई उधारी को विकास और पूंजीगत खर्च से जोड़कर पेश करती है, लेकिन बढ़ते कर्ज के अनुपात में रोजगार और जमीनी विकास का असर दिखाई देना चाहिए।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भविष्य की पीढ़ियों पर कर्ज का बोझ बढ़ाया जा रहा है। कांग्रेस ने सरकार से कर्ज से होने वाले खर्च और उसके परिणामों का स्पष्ट विवरण सार्वजनिक करने की मांग की है।
सरकार बोली—विकास कार्यों में लगेगा पैसा
राज्य सरकार का पक्ष है कि यह ऋण सड़क, सिंचाई, बिजली, मेडिकल कॉलेज और अन्य अधोसंरचना परियोजनाओं जैसी पूंजीगत जरूरतों के लिए लिया जा रहा है। वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा है कि नई उधारी का उपयोग वेतन, भत्ते, पेंशन, प्रशासनिक खर्च या लाड़ली बहना योजना के भुगतान में नहीं किया जाएगा।
सरकार का तर्क है कि पूंजीगत व्यय से नई परिसंपत्तियां तैयार होती हैं, आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है और रोजगार के अवसर बन सकते हैं।
बजट में पूंजीगत व्यय 78,920 करोड़ रुपये
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए मध्य प्रदेश का पूंजीगत परिव्यय करीब 78,920 करोड़ रुपये बजट में प्रस्तावित है। वहीं राजस्व व्यय 3.08 लाख करोड़ रुपये से अधिक अनुमानित है। PRS के बजट विश्लेषण के मुताबिक वेतन, पेंशन और ब्याज जैसे प्रतिबद्ध खर्च भी राज्य के राजस्व का बड़ा हिस्सा लेते हैं।
ऐसे में बढ़ती उधारी को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच वित्तीय प्रबंधन, विकास और रोजगार पर राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
