जबलपुर। जबलपुर शहर से गुजरने वाली Extra High Tension (EHT) यानी अति उच्च दाब विद्युत लाइनों के नीचे और आसपास कथित रूप से निर्माण की अनुमति दिए जाने का मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने ग्रीष्म जैन और अमित पटेल की याचिका पर राज्य शासन तथा संबंधित विभागों के कई वरिष्ठ अधिकारियों को नोटिस जारी किए हैं।
नोटिस अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा, अतिरिक्त मुख्य सचिव शहरी विकास, MP TRANSCO EHT Maintenance के मैनेजिंग डायरेक्टर, चीफ इंजीनियर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, जिला दंडाधिकारी जबलपुर, पुलिस अधीक्षक जबलपुर, संयुक्त संचालक टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम आयुक्त सहित संबंधित अधिकारियों को जारी किए गए हैं।
220 और 133 केवी लाइन के आसपास निर्माण पर आपत्ति
याचिका में कहा गया है कि जबलपुर शहर की सीमाओं से 220 केवी और 133 केवी की अति उच्च दाब ट्रांसमिशन लाइनें गुजरती हैं। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि इन लाइनों के नीचे और आसपास लगभग 15 से 27 मीटर के निर्धारित दायरे में निर्माण पर प्रतिबंध लागू होता है।
आरोप है कि इस तथ्य को नजरअंदाज या छुपाते हुए टाउन एंड कंट्री प्लानिंग और नगर निगम स्तर पर मकान, पार्क एवं अन्य निर्माणों की अनुमति दी जा रही है।
दुर्घटना और मौतों का भी दिया हवाला
याचिका में दावा किया गया है कि EHT लाइनों के आसपास निर्माण के कारण पूर्व में दुर्घटनाएं और मौतें हो चुकी हैं। यह भी कहा गया है कि इस संबंध में EHT Maintenance के मुख्य अभियंता द्वारा जिला दंडाधिकारी को जानकारी दी गई थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
याचिकाकर्ताओं ने राजनीतिक दबाव में कार्रवाई न होने का भी आरोप लगाया है। यह आरोप फिलहाल याचिका का हिस्सा हैं और संबंधित अधिकारियों का जवाब आना बाकी है।
अवैध कॉलोनियों का भी मुद्दा
याचिका में कहा गया है कि शहर के विभिन्न हिस्सों में EHT लाइनों के आसपास कथित रूप से अवैध कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। इसे मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 और Electricity Act 2003 के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐसी कॉलोनियां और निर्माण नागरिकों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं।
‘Planned Development’ को बताया अधिकार
याचिका में यह भी कहा गया है कि नियोजित और सुरक्षित विकास नागरिकों का मूल अधिकार है। राज्य शासन, कलेक्टर और जिला दंडाधिकारी को इस संबंध में लगातार लिखित सूचना दिए जाने के बावजूद अधिकारियों द्वारा प्रभावी कर्तव्य पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया है।
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सतीश वर्मा और लावण्या वर्मा ने पक्ष रखा।
अगली सुनवाई 25 नवंबर को
हाईकोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
यह स्पष्ट है कि नोटिस जारी होना याचिका में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि नहीं है। संबंधित विभागों और अधिकारियों का जवाब आने के बाद ही मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
.jpg)