जबलपुर। मध्य प्रदेश में बढ़ती बिजली दरों और फ्यूल चार्ज के बीच नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच ने कोयले पर 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किए गए जीएसटी का विरोध किया है। मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे ने कहा कि इसका असर बिजली उत्पादन लागत और अंततः उपभोक्ताओं पर पड़ सकता है। इस मुद्दे को लेकर जिला प्रशासन के माध्यम से केंद्रीय वित्त मंत्री को ज्ञापन भेजा गया है।
यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि घरेलू बिजली की मूल सप्लाई पर सीधे 18 प्रतिशत GST नहीं लगाया गया है। CBIC के अनुसार बिजली की बिक्री GST से मुक्त है। हालिया बदलाव कोयले पर लागू GST दर से जुड़ा है, जिसे 22 सितंबर 2025 से 5 प्रतिशत से बढ़ाकर 18 प्रतिशत किया गया था। मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के 2026-27 टैरिफ आदेश में भी इस बदलाव का उल्लेख है।
उपभोक्ता मंच ने आगामी 7 अक्टूबर को होने वाली GST परिषद की बैठक से पहले अपनी आपत्ति दर्ज कराई है। बैठक में GST व्यवस्था से जुड़े कई प्रक्रियागत सुधारों और अन्य विषयों पर विचार किया जाना है।
डॉ. नाजपांडे के अनुसार कोयले पर बढ़ी GST दर और राज्य में फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज के बढ़ते स्तर से उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है। हाल में मध्य प्रदेश में FPPAS की दर 4.59 प्रतिशत से बढ़कर 5.063 प्रतिशत होने की रिपोर्ट भी सामने आई है।
5 प्रतिशत GST बहाल करने की मांग
मंच ने मांग की है कि कोयले पर GST को दोबारा 5 प्रतिशत किया जाए और बिजली उत्पादन लागत में होने वाले किसी भी लाभ का फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए।
MPERC के 2026-27 टैरिफ आदेश में हितधारकों ने भी यह मुद्दा उठाया था कि कोयले पर ₹400 प्रति टन का सेस हटने और GST संरचना बदलने से होने वाले लागत प्रभाव को बिजली खरीद लागत तथा उपभोक्ता टैरिफ में उचित रूप से समायोजित किया जाना चाहिए।
