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जबलपुर में दुर्गोत्सव: गरबा आयोजनों के लिए पुलिस ने जारी किए कड़े सुरक्षा निर्देश, रात 11 बजे तक ही होगी अनुमति



 शारदीय दुर्गोत्सव के दौरान शहर में होने वाले गरबा आयोजनों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित तरीके से संपन्न कराने के लिए जबलपुर पुलिस ने सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के मार्गदर्शन में आयोजित इस उच्चस्तरीय बैठक में पुलिस अधिकारियों और लगभग 150 गरबा आयोजकों ने हिस्सा लिया।

बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहर डॉ. आयुष जाखड़ और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मनीष भारद्वाज ने सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चर्चा की। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि आयोजनों के दौरान हुड़दंगियों और सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों से सख्ती से निपटा जाएगा।

प्रमुख निर्देश और सुरक्षा व्यवस्था:

  • समय सीमा: सभी गरबा आयोजन रात ठीक 11:00 बजे तक पूरी तरह बंद करने होंगे।

  • प्रवेश और पास व्यवस्था: गरबा स्थल पर केवल वैध पास धारकों को ही गहन चेकिंग के बाद प्रवेश दिया जाएगा। प्रतियोगियों को अपने साथ कोई भी सामान ले जाने की अनुमति नहीं होगी।

  • परिचय पत्र और डेटा: प्रतियोगियों के लिए परिचय पत्र अनिवार्य होंगे। आयोजकों को प्रतियोगियों, अतिथियों और कुल क्षमता की पूरी जानकारी संबंधित थाने, सीएसपी और एसडीएम (नगर दंडाधिकारी) को सौंपनी होगी।

  • सुरक्षा बल और निगरानी: गरबा स्थलों पर पर्याप्त पुलिस बल के साथ-साथ सिविल ड्रेस में पुलिसकर्मी भी तैनात रहेंगे, जो आसपास की गलियों में गश्त कर मनचलों पर नजर रखेंगे। महत्वपूर्ण स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाना अनिवार्य किया गया है।

  • वॉलेंटियर्स और गार्ड: आयोजकों को अपनी क्षमता के अनुसार सिक्योरिटी गार्ड और वॉलेंटियर्स तैनात करने होंगे। इनकी सूची थाने में देनी होगी ताकि उन्हें 'विशेष पुलिस अधिकारी' (SPO) का दर्जा मिल सके।

  • साउंड और सांस्कृतिक मर्यादा: ध्वनि विस्तारक यंत्र (साउंड सिस्टम) के लिए विधिवत अनुमति लेनी होगी और आवाज को परिसर के भीतर ही सीमित रखना अनिवार्य है। पुलिस ने पारंपरिक वेशभूषा और धार्मिक प्रस्तुतियों पर विशेष जोर दिया है।

  • भीड़ नियंत्रण और पार्किंग: पुरुष और महिलाओं के लिए प्रवेश के लिए अलग-अलग कतारें, पर्याप्त पार्किंग स्थल और आपातकालीन स्थिति के लिए आकस्मिक निकासी द्वार (Emergency Exit) बनाना जरूरी होगा।

  • अग्निशमन और विद्युत सुरक्षा: पंडालों में सजावट के दौरान कटी-फटी या घटिया केबल का उपयोग न करने, उच्च गुणवत्ता वाले तारों का इस्तेमाल करने और उन्हें बच्चों की पहुंच से दूर रखने के निर्देश दिए गए हैं। इसके अलावा परिसरों में फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशमन यंत्र) और इमरजेंसी लाइट की वैकल्पिक व्यवस्था रखनी होगी।

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