लेखक : मोहम्मद अकरम अंसारी
15 अगस्त केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है, बल्कि यह उस गौरवशाली संघर्ष, त्याग और बलिदान की याद दिलाने वाला दिन है, जिसकी बदौलत आज हम एक स्वतंत्र राष्ट्र के नागरिक के रूप में अपना जीवन जी रहे हैं। यह वह दिन है जब देश की हर गली, हर शहर और हर गांव में तिरंगा शान से लहराता है और हर भारतीय के दिल में देशभक्ति की एक नई उमंग जन्म लेती है।
हमारा तिरंगा हमारी शान है।
यह केवल तीन रंगों से बना एक ध्वज नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशाओं, सपनों, संघर्षों और एकता का प्रतीक है। केसरिया हमें साहस और त्याग की प्रेरणा देता है, सफेद रंग शांति और सत्य का संदेश देता है, हरा रंग समृद्धि, विकास और जीवन की हरियाली का प्रतीक है, जबकि बीच में बना अशोक चक्र हमें निरंतर आगे बढ़ते रहने और कर्म के मार्ग पर चलते रहने की प्रेरणा देता है।
भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता में छिपी एकता है। सारी दुनिया में भारत एक ऐसा महान देश है, जहां अलग-अलग धर्म, भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं और पहनावे होने के बावजूद लोग सदियों से एक साथ रहते आए हैं। यहां मंदिर की घंटियों की आवाज के साथ मस्जिद की अजान सुनाई देती है, गुरुद्वारों में सेवा की भावना दिखाई देती है और चर्चों में प्रार्थना की गूंज सुनाई देती है। यही भारत की खूबसूरती है और यही उसकी असली पहचान है।
भारत की गंगा-जमुनी तहजीब हमारी उस साझा संस्कृति का प्रतीक है, जिसमें इंसान को सबसे पहले इंसान माना जाता है। यहां ईद आती है तो खुशियां बांटने के लिए दूसरे धर्मों के लोग भी घर पहुंचते हैं, दिवाली के दीपक सबके आंगन को रोशन करते हैं, क्रिसमस की खुशियां हर चेहरे पर मुस्कान लाती हैं और गुरुपर्व का लंगर समाज को बराबरी और भाईचारे का संदेश देता है। हमारे त्योहार अलग हो सकते हैं, लेकिन खुशियां मनाने का दिल एक है।
हमारी भाषाएं अलग-अलग हैं, हमारी बोलियां अलग हैं, हमारे पहनावे अलग हैं, हमारे खान-पान और रीति-रिवाज अलग हैं, लेकिन जब बात देश की आती है तो हम सबकी पहचान एक हो जाती है—हम भारतीय हैं।
यही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है।
आज जब हम आजादी की वर्षगांठ मना रहे हैं, तो हमें उन लाखों ज्ञात-अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों को भी याद करना चाहिए, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। किसी ने जेल की यातनाएं सहीं, किसी ने गोलियां खाईं, किसी ने अपना परिवार छोड़ा और किसी ने हंसते-हंसते अपने प्राण देश के नाम कर दिए। उनकी कुर्बानियों की वजह से ही आज हमारे हाथों में आजादी का तिरंगा है।
लेकिन आजादी केवल अधिकारों का नाम नहीं है, यह जिम्मेदारियों का नाम भी है।
एक मजबूत भारत केवल सरकारों और संस्थाओं से नहीं बनता। देश तब मजबूत बनता है जब उसका हर नागरिक अपने कर्तव्यों को समझता है। जब हम कानून का सम्मान करते हैं, सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करते हैं, स्वच्छता को अपनाते हैं, प्रकृति की रक्षा करते हैं, महिलाओं और बच्चों का सम्मान करते हैं, जरूरतमंद की मदद करते हैं और समाज में नफरत के बजाय भाईचारे को बढ़ावा देते हैं—तभी हम सच्चे अर्थों में स्वतंत्रता का सम्मान करते हैं।
आज जरूरत इस बात की है कि हम अपने बच्चों को केवल यह न बताएं कि आजादी कैसे मिली, बल्कि यह भी बताएं कि इस आजादी को मजबूत कैसे रखना है। उन्हें यह समझाना होगा कि धर्म, जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर बंटना भारत की ताकत नहीं, बल्कि उसकी कमजोरी है। हमारा भविष्य तभी सुरक्षित होगा जब हम एक-दूसरे के अधिकारों, भावनाओं और सम्मान की रक्षा करेंगे।
तिरंगा जब आसमान में लहराता है तो उसमें किसी एक धर्म, जाति या समुदाय का रंग नहीं दिखाई देता। उसमें पूरे भारत की तस्वीर दिखाई देती है। उसमें किसान की मेहनत है, जवान का साहस है, मजदूर का पसीना है, शिक्षक का ज्ञान है, वैज्ञानिक की खोज है, डॉक्टर की सेवा है और देश के हर नागरिक के सपने हैं।
इसलिए इस स्वतंत्रता दिवस पर आइए हम केवल तिरंगा फहराकर अपने कर्तव्य की इतिश्री न करें। आइए संकल्प लें कि हम अपने देश को और बेहतर बनाने में अपना योगदान देंगे। हम नफरत से ऊपर उठेंगे, इंसानियत को महत्व देंगे और आने वाली पीढ़ियों के लिए ऐसा भारत बनाएंगे, जहां हर नागरिक सम्मान, समानता और सुरक्षा के साथ अपना जीवन जी सके।
क्योंकि—
मंदिर हो या मस्जिद, गुरुद्वारा हो या चर्च,
भारत की मिट्टी में सबके लिए है प्रेम और अपनापन।
भाषाएं भले ही हों हजार,
दिल में बसता है एक ही नाम—भारत।
आइए इस स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को सलाम करें, अपने शहीदों को नमन करें और भारत की एकता-अखंडता को और मजबूत करने का संकल्प लें।
हमारा तिरंगा केवल हमारी पहचान नहीं, हमारी आन, हमारी शान और हमारे भारत की आत्मा है।
जय हिंद! 🇮🇳
वंदे मातरम्!
— मोहम्मद अकरम अंसारी
लेखक

