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मेडिकल कॉलेज में एंजियोग्राफी जांच बंद, 4-7 दिनों से कैथ लैब पर ताला; हार्ट मरीजों की बढ़ी परेशानी



जबलपुर। नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज अस्पताल में तकनीकी खराबी के चलते जीवनरक्षक एंजियोग्राफी जांच पूरी तरह बंद हो गई है। संभाग के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की कैथ लैब में मशीन का एक मुख्य पार्ट खराब होने के कारण ताला लटका हुआ है। प्रशासनिक जानकारी के मुताबिक यह समस्या करीब चार दिन पहले सामने आई, जबकि अन्य दावों में जांच सात दिनों से बंद होने की बात कही जा रही है।

जबलपुर संभाग के अलावा आसपास के कई जिलों से हार्ट अटैक और सीने में दर्द जैसी गंभीर स्थिति में मरीज मेडिकल अस्पताल पहुंचते हैं। ऐसे में एंजियोग्राफी सेवा बंद होने से गंभीर हृदय रोगियों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जांच की बहाली को लेकर प्रबंधन की ओर से अभी तक कोई निश्चित समयसीमा घोषित नहीं की गई है।

बैकअप पार्ट नहीं होने से बढ़ी परेशानी

बताया जा रहा है कि कैथ लैब की मशीन में रखरखाव की कमी और पुराने कलपुर्जों को समय पर नहीं बदले जाने के कारण तकनीकी समस्याएं सामने आती रही हैं। वर्तमान में खराब हुए मुख्य पार्ट की आपूर्ति और मरम्मत में देरी के कारण पूरी व्यवस्था प्रभावित है।

एंजियोग्राफी के जरिए हृदय की धमनियों में ब्लॉकेज की स्थिति का पता लगाया जाता है। जांच उपलब्ध नहीं होने से डॉक्टरों के लिए मरीज के आगे के उपचार की दिशा तय करना मुश्किल हो रहा है। सरकारी अस्पताल में वैकल्पिक व्यवस्था या उपकरण का बैकअप नहीं होने से मरीजों को निजी जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।

गरीब मरीजों पर निजी जांच का आर्थिक बोझ

मेडिकल अस्पताल में एंजियोग्राफी बंद होने का सबसे ज्यादा असर गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों पर पड़ रहा है। निजी केंद्रों पर महंगी जांच कराने के लिए मरीजों के परिजनों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। कई मामलों में पैसे की व्यवस्था नहीं हो पाने के कारण इलाज में देरी की आशंका भी बनी हुई है।

दूरदराज से आने वाले मरीजों को हो रही परेशानी

अस्पताल की वेबसाइट और हेल्पलाइन के माध्यम से कैथ लैब बंद होने की जानकारी सार्वजनिक नहीं किए जाने पर भी सवाल उठ रहे हैं। दूरदराज के ग्रामीण क्षेत्रों से मरीजों को लेकर आने वाले परिजनों को अस्पताल पहुंचने के बाद जांच बंद होने की जानकारी मिल रही है। इससे उनका समय, यात्रा खर्च और अन्य संसाधन व्यर्थ हो रहे हैं।

मरीजों और तीमारदारों ने अस्पताल प्रबंधन से मांग की है कि मशीन की मरम्मत, खराब पार्ट की उपलब्धता और एंजियोग्राफी सेवा दोबारा शुरू होने की संभावित तारीख की जानकारी स्पष्ट रूप से नोटिस बोर्ड और डिजिटल माध्यमों पर सार्वजनिक की जाए।

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