जबलपुर | रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय शैक्षणेत्तर कर्मचारी संघ सदैव कर्मचारियों की ज्वलंत एवं न्यायोचित मांगों की पूर्ति के लिए प्रतिबद्ध रहा है। कर्मचारी संघ के अध्यक्ष संजय यादव तथा महासचिव अंकित श्रीवास ने बताया कि विगत लगभग ढाई वर्षों से विश्वविद्यालय में घटनाक्रम ऐसे रहे हैं, जिन्होंने विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाए हैं।
विगत ढाई वर्षों में कर्मचारियों के हित में कोई ठोस एवं सकारात्मक निर्णय सामने नहीं आया है। इसके विपरीत, लगभग 27 वर्षों से प्रचलित श्रम साध्य भत्ते को समाप्त कर दिया गया। वर्ष 1997 में सृजित 70 पदों की बहाली, वर्ष 2008 में नियमित कर्मचारियों को समयमान वेतनमान की अंतर राशि का भुगतान, तकनीकी कर्मचारियों के समयमान वेतनमान के प्रकरण, अनुकम्पा नियुक्तियां तथा न्यायालयीन प्रकरणों में लगातार प्रतिकूल निर्णय—ये सभी प्रशासनिक उदासीनता और निर्णयहीनता के उदाहरण हैं। कर्मचारी संघ ने यह मांग की है कि कर्मचारियों की समस्त समस्याओं का त्वरित एवं न्यायसंगत निराकरण किया जाए। पदोन्नति में हो रहे विलंब के कारण अनेक कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं, उन्हें पदोन्नति का लाभ पूर्व प्रभाव (बैक डेट) से प्रदान किया जाये।
