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स्वतंत्रता सेनानी जवाहरलाल दर्डा की स्मृति में सेंट्रल जेल को मिली नई सौगात



जबलपुर। जबलपुर सेंट्रल जेल परिसर में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्वर्गीय जवाहरलाल दर्डा की स्मृति में एक आधुनिक सामुदायिक सभा भवन (कम्युनिटी हॉल) का निर्माण किया जाएगा। इस भवन का शिलान्यास शनिवार को प्रदेश के मंत्री प्रहलाद पटेल ने किया। जेल प्रशासन के अनुसार, यह सेंट्रल जेल के इतिहास में पहला अवसर है, जब किसी परिवार ने अपने निजी सहयोग से कैदियों के हित में इस तरह का सामाजिक निर्माण कार्य कराने की पहल की है।

शिलान्यास समारोह में लोकमत समाचार के प्रबंध संचालक राजेंद्र दर्डा, विधायक अशोक रोहाणी, अशोक जैन, अंशुमान शुक्ल, जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। वक्ताओं ने शिक्षा, पत्रकारिता और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में दर्डा परिवार के योगदान की सराहना करते हुए इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी बताया।
जबलपुर जेल से जुड़ी थीं जवाहरलाल दर्डा की यादें

लोकमत समाचार के प्रबंध संचालक राजेंद्र दर्डा ने बताया कि उनके पिता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी जवाहरलाल दर्डा का जबलपुर से विशेष जुड़ाव रहा है। उन्होंने बताया कि मात्र 17 वर्ष की आयु में महात्मा गांधी से प्रेरित होकर वे स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हुए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान 10 अगस्त को 20 वर्ष की आयु में उन्हें गिरफ्तार कर जबलपुर सेंट्रल जेल लाया गया था, जहां उन्होंने करीब 19 माह तक कारावास की सजा काटी।

राजेंद्र दर्डा ने कहा कि लंबे समय बाद जबलपुर आने का अवसर मिला और जेल परिसर में विकसित संग्रहालय (म्यूजियम) को देखकर उन्हें गर्व की अनुभूति हुई। उन्होंने जेल प्रशासन द्वारा स्वतंत्रता सेनानियों की स्मृतियों को सहेजने के प्रयासों की भी सराहना की।
'जेल सुधार और स्वीकार का स्थान है' : प्रहलाद पटेल

मुख्य अतिथि मंत्री प्रहलाद पटेल ने अपने संबोधन में कहा कि जबलपुर और विदर्भ का ऐतिहासिक संबंध देश के स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराने का अभियान जबलपुर से प्रारंभ हुआ था, जिसके बाद यह नागपुर तक पहुंचा। उन्होंने नेताजी सुभाष चंद्र बोस से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों का भी उल्लेख किया।

प्रहलाद पटेल ने कहा कि "जेल कोई तिरस्कृत स्थान नहीं, बल्कि सुधार, आत्ममंथन और समाज में पुनः स्वीकार्यता की दिशा में आगे बढ़ने का केंद्र है।" उन्होंने दर्डा परिवार द्वारा निजी संसाधनों से सभा भवन का निर्माण कराए जाने को समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया।
कैदियों को मिलेंगे रचनात्मक गतिविधियों के नए अवसर

जेल अधीक्षक अखिलेश तोमर ने बताया कि जबलपुर सेंट्रल जेल स्वतंत्रता सेनानियों की तपस्थली रही है। वर्तमान में सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए उपलब्ध छोटा हॉल बड़े आयोजनों के लिए पर्याप्त नहीं था। नए आधुनिक सामुदायिक हॉल के निर्माण से जेल में निरुद्ध बंदियों को सांस्कृतिक, शैक्षणिक और रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने के बेहतर अवसर मिलेंगे। इससे उनके व्यक्तित्व विकास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में सकारात्मक वातावरण तैयार होगा।

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