जबलपुर/ मध्यप्रदेश में हाल ही में अपनी नई एकीकृत मत्स्य नीति 2026 लागू कर मत्स्य क्षेत्र में "ब्लू इकाॅनामी" के एक महत्वपूर्ण आधार के रूप में विकसित करने की दिशा में बङा कदम उठाया है। इसी क्रम में विगत 6 जुलाई को जबेदी अल कुवैत की अग्रणी कंपनी और कामदार्स केयर इंदौर के बीच मत्स्य पालन के लिये 7 हजार 430 करोड़ रुपये का अनुबंध संपादित हुआ। इस निवेश से इंदिरा सागर, बरगी बाणसागर और बारना जलाशय में केज कल्चर सहित बैकवर्ड और फाॅरवर्ड लिंकेज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया. बरगी बांध विस्थापित एवं पुनरवास संघ के राजकुमार सिन्हा ने कहा कि एकिकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के अन्तर्गत गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय विस्तार दिया जा रहा है। मध्यप्रदेश में लगभग 15 से 16 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मत्स्य व्यवसाय से जुड़े माने जाते हैं। अधिकांश मछुआरे गरीबी रेखा या उसके आसपास जीवन यापन करते हैं। बाजार का नियंत्रण ठेकेदारों या मध्यस्थों के पास होने से मछुआरों को वास्तविक लाभ कम मिलता है। जलाशयों को ठेकेदार या बाहरी व्यक्तियों को दिया जाता है। छोटे मछुआरे अधिकार विहीन और ठेकेदारों के अंदर मजदूर बन कर रह जाते हैं। जलाशय के नीलामी में स्थानीय मछुआरा की सहकारी समिति भाग ही नहीं ले पाता है। क्योंकि लीज की दरें बहुत अधिक होती है, प्रक्रियाएं जटिल और सरकारी अधिकारी एवं ठेकेदार के बीच गठजोड़ के कारण गरीब समूह भाग भी नहीं ले पाते.
राष्ट्रीय मत्स्य पालक दिवस मप्र में नई मत्स्य नीति की असली कसौटी
byEditor In Chief- मो.अशफाक आरिफ़
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