प्रमोशन नियमो पर स्थगन देने पर इंकार समस्त पदोन्नतिया है हाईकोर्ट के अधीन



जबलपुर। प्रमोशन में आरक्षण के 6 मामलो की सुनवाई कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूशिया तथा जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंड पीठ द्वारा की गई | सुनवाई के दौरान सामान्य वर्ग की और से  सरकार पर प्रमोशन की तैयारी और महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन से पीछे हटने का आरोप लगाया। प्रमोशन में आरक्षण मामले में हाईकोर्ट में तीखी बहस हुई सरकार ने महाधिवक्ता की अनुपलब्धता का हवाला देकर समय मांगा सामान्य वर्ग ने महाधिवक्ता के पुराने मौखिक आश्वासन का वीडियो दिखाने की भी बात कही | अजाक्स संघ की ओर से पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह ने कहा कि प्रमोशन पर हाईकोर्ट की कोई लिखित में रोक नहीं है, अधिवक्ता ने यह भी कहा कि याचिका कर्ता  अपने मूल विभाग से दुसरे विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ है जो अपने मूल विभाग बापिस जाना नहीं चाहते जिनको संभावना है की यदि  पदोन्नति होती है तो उन्हें उनके मूल विभाग जाना पडेगा इसलिए याचिका कर्ताओ द्वारा प्रमोशन नियमो को चुनोती दी गई है वास्तविक रूप से इनकी याचिकाओ को देखा जाए तो नियमो के किसी भी प्रावधान को बताने में असफल रहे है की किस प्रकार उक्त नियम असंवैधानिक है |  कोर्ट को यह भी बताया की आजक्स संघ की और से अप्रेल 2025 में याचिका दाखिल कर स्रार्वोच्च न्यायालय द्वारा पारित अंतरिम आदेशो के अनुरूप समस्त कर्मचारियों के प्रमोशन करने की राहत चाही गई थी , सरकार ने उक्त याचिका के लंबित रहने के दौरान जून 2025 में पदौन्नति नियम बनाए गए है, जो सर्वोच्च न्यायालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप है | कोर्ट को यह भी बताया की उक्त नियमो के कुछ नियम है जो अनारक्षित पदों पर मेरिटोरियस कर्मचारियों को रोकता है फिर भी आजाक्स संघ उक्त नियमो के समर्थन में है | अतिरिक्त महाधिवक्ता जन्ह्बी पंडित ने महाधिवक्ता के नाम पर अगली तारीख पर सुनवाई का अनुरोध किया गया साथ ही अतिरिक्त महाधिवक्ता द्वारा यह भी कहा गया कि इस दिन मामले के गुण दोष पर कोई तर्क नहीं रखे जा सके। विस्तृत पक्ष महाधिवक्ता अगली सुनवाई में प्रस्तुत करेंगे प्रमोशन आदेशों को लेकर सरकार पर आरोप लगाते हुए याचिका करता के अधिवक्ता मनोज शर्मा ने कोर्ट को बताया कि उन्होंने दावा किया कि पिछली रात विधानसभा से 15 विभागों के प्रमोशन आदेश जारी किए गए हैं उन्होंने अदालत को यह बताने का प्रयास किया कि महाधिवक्ता द्वारा न्यायालय के समक्ष मौखिक आश्वासन दिया था की अंतिम निर्णय आने तक इन नियमों के तहत डीपीसी नहीं की जाएगी इन सारे तर्कों का खंडन करते हुए आजाक्स  संघ की ओर से न्यायालय को अवगत कराया की न्यायालय के रिकॉर्ड के किसी भी आदेश पत्रिका में प्रमोशन प्रक्रिया पर रोक से संबंधित कोई आदेश पारित नहीं किया गया है ना ही पदोन्नति नियम 2025 के प्रवर्तन  पर माननीय न्यायालय द्वारा किसी भी प्रकार की रोक लगाई गई है | मामलो की अगली सुनवाई 13 जुलाई नियत की गई है |

Post a Comment

Previous Post Next Post
askari times