एसोसिएट प्रोफेसर के पद को हाईकोर्ट में चुनौती


जबलपुर। मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडीकल के एसोसीयट प्रोफ़ेसर के 40 पदों पर सीधी भर्ती से नियुक्ति हेतु विज्ञापन निकाले। जबकि उक्त 40 पद वर्ष 2024 में स्वीकृत होकर पदोनत्ति से ही भरे जाने है।

ज्ञातव्य हो कि एसोसीयट प्रोफ़ेसर के पद पर पदोन्नति हेतु असिसटेंट प्रोफ़ेसर पर कार्यरत शिक्षकों की नियुक्ति की जा सकती है, जिसमें अनुभव उल्लिखित है । वर्तमान में नेताजी सुभाष चंद्र बोस मेडिकल कॉलेज जबलपुर में लगभग 12 महिलायें असिसटेंट प्रोफ़ेसर के रूप में कार्यरत है, जिनके अनुसार उनके पास आवश्यक योग्यता एवं अहर्ता है परंतु मध्य प्रदेश शासन के द्वारा पदोन्नति ना करके उक्त पदो को अवैधानिक रूप से सीधी भर्ती से भरने का प्रयास किया जा रहा है। 

ज्ञातव्य को कि  उक्त पद वर्ष 2024 में स्वीकृत होकर आए है शासन के पास ऐसा कोई कारण नहीं है कि  वे पदोन्नति की प्रक्रिया को पूर्ण ना करे। याचिककर्ता डॉक्टर प्रवीणा सूर्यवंशी, डॉक्टर श्वेता ठाकुर, डॉक्टर गायत्री वर्मा व अन्य  द्वारा माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर के समक्ष याचिका प्रस्तुत कर उक्त एसोसीयट प्रोफ़ेसर के पद पर की जा रही भर्ती को चुनौती एक याचिका के माध्यम से दी गई। जिसकी सुनवाई उच्च न्यायालय की एकल खंडपीठ के न्यायाधिपति विशाल धगट के समक्ष की गई। राज्य शासन के द्वारा मौखिक आपत्ति ली गई कि वे पदोनत्ति ना कर पाने की स्थिति में सीधी भर्ती कर सकते है, जिसके जवाब में याचिककर्ता के अधिवक्ता पंकज दुबे, अजीत शुक्ला व सोनाली पांडे  के द्वारा यह तर्क दिया गया कि पदोन्नति ना करने का कोई कारण बताया नहीं गया है, जबकि याचिककर्ता योग्य है और उनसे कार्य लिया जा रहा है, दोनो पक्षों को सुनने के बाद उच्च न्यायालय के द्वारा मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल के द्वारा की जा रही भर्ती को उक्त याचिका के अंतिम परिणाम के आधीन  रहेगी । मध्य प्रदेश कर्मचारी मंडल, भारतीय नर्सिंग काउन्सिल को नोटिस जारी किए गए है, प्रकरण पर आगामी सुनवाई चार सप्ताह होगी।

Post a Comment

Previous Post Next Post
askari times