प्रमोशन मे आरक्षण के मामलो मे अजाक्स ने रखा पक्ष हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 13 को



जबलपुर। प्रमोशन मे आरक्षण के नियमो  की संवैधानिकता को  चुनौती  देने वाले  प्रकरणों  की चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा एवं विनय सराफ की खंडपीठ द्वारा अजाक्स संगठन का पक्ष सुना ! अजाक्स सघ  की ओर से सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ.के.एस.चौहान एवं वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह  ठाकुर ने पक्ष रखते हुए कोर्ट को  बताया की प्रमोशन नियम  2025  के  नियम  11(1,2,3) सहित अन्य नियम पूर्णतः  असंवैधानिक है, क्युकि  उक्त  नियम सर्व प्रथम  आरक्षित  वर्ग  की ग्रेडेशन लिस्ट बनाने का प्रावधान करती है तथा आरक्षित वर्ग के कर्मचारी जो मेरिट के आधार पर पदोन्नति हुए हैं। उनको भी आरक्षित वर्ग में गणना करने का नियम प्रावधान करता है, अर्थात एससी एसटी वर्ग के लिए मेरिट पर प्रमोशन से संबंधित कोई भी प्रावधान नियमों में मौजूद नहीं है,जबकि भारत का संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के इंदिरा साहनी के जजमेंट सहित कई फैसले है जो स्पष्ट रूप से प्रावधान करते हैं, की सर्वप्रथम अनारक्षित वर्ग में प्रमोशन होंगे तत्पश्चात   आरक्षित वर्ग के एवं जो कर्मचारी मेरिट के  आधार पर अनारक्षित में चयनित होंगे उनकी गणना आरक्षित वर्ग में किए जाने का उक्त नियमो मे प्रावधान है जो की पूर्ण रूप से सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा निर्देशों के प्रतिकूल है तब हाई कोर्ट द्वारा कहा गया कि जब नियमों में इतनी बड़ी त्रुटि है तो अपने चेलेंगे क्यों नहीं किया तब अजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि संघ नहीं चाहता है कि न्यायिक प्रक्रिया के कारण प्रमोशन बाधित हो, फिर भी हाईकोर्ट द्वारा अजाक्स संघ को सजेस्टेड किया कि आपके द्वारा नियमों के प्रवर्तन करने हेतु दायर याचिका में आवश्यक संशोधन करें, तब आजाक्स संघ की ओर से कहा गया कि उपरोक्त याचिकाओं में उक्त नियम ऑलरेडी चैलेंज है जिसे माननीय न्यायालय स्वविवेक  से सुप्रीम कोर्ट के मार्गदर्शी सिद्धांतों के अनुरूप नियमों में असंवैधानिकता को दूर करने हेतु सरकार को निर्देशित कर सकती है। अजाक्स संघ की ओर से आगे अपने तर्क में कोर्ट को अवगत कराया गया कि प्रमोशन के नियमों में क्रिमीलेयर ना तो सिद्धांत के रूप से और ना ही व्यवहारिक रूप से लागू किया जा सकता है औऱ ना ही उक्त संबंध में कोई संवैधानिक प्रावधान है। अजा. संघ की ओर से कोर्ट को यह भी बताया गया कि मध्य प्रदेश के समस्त विभागों में मौजूद कर्मचारी के प्रस्तुत डाटा के मुताबिक आरक्षित वर्ग का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। याचिकाकर्ताओं ने जो डाटा पेश किया है उसमें उन सभी आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों की गणना कर ली गई है जो मेरिट के आधार पर अनारक्षित पदों के विरुद्ध पदोन्नति हुए हैं। वास्तविक रूप से देखा जाए तो एससी एसटी की कुल आबादी मध्य प्रदेश में 36% है जिनका उच्च पदों पर प्रतिनिधित्व 7 से 18 परसेंट ही है ! अजाक्स संघ द्वारा दायर याचिका में उक्त असंवैधानिक नियमों में आवश्यक संशोधन करने हेतु संशोधन याचिका दाखिल की जाएगी। अजाक्स संघ की शेष बहस आगामी 13 जनवरी 2026 को होंगी।  अजाक संघ एवं एससी एसटी कर्मचारी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता डॉक्टर के. एस. चौहान वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, पुष्पेंद्र कुमार शाह उदय कुमार ने पक्ष रखा।

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