राज्य पुलिस सेवा के आ अधिकारियों के पक्ष में कोर्ट का फैसला


जबलपुर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण की पीठ ने मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन द्वारा दायर मूल आवेदन को स्वीकार करते हुए केंद्र एवं राज्य सरकार की उस लापरवाही पर कड़ी टिप्पणी की है, जिसमें भारतीय पुलिस सेवा (IPS) कैडर रिव्यू जैसे अनिवार्य वैधानिक कर्तव्य को समय पर पूरा नहीं किया गया।यह याचिका मध्यप्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर की गई थी, जिसमें यह मुद्दा उठाया गया कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पाँच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, किंतु पिछले लगभग दो दशकों से यह प्रक्रिया लगातार विलंबित की जाती रही। इस देरी के कारण राज्य पुलिस सेवा (DSP/ASP) के अनेक पात्र अधिकारी IPS में पदोन्नति/इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं  ।

 ट्रिब्यूनल ने यह माना कि कैडर रिव्यू कोई औपचारिक या विवेकाधीन कार्य नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार पर डाला गया अनिवार्य दायित्व है। इस दायित्व के निर्वहन में हुई देरी को न तो प्रशासनिक उदासीनता और न ही निष्क्रियता के आधार पर उचित ठहराया जा सकता। ट्रिब्यूनल ने यह भी स्वीकार किया कि इस प्रकार की देरी से अधिकारियों के अनुच्छेद 14 एवं 16 के अंतर्गत प्राप्त समानता और पदोन्नति पर विचार के मौलिक अधिकार प्रभावित होते है । आवेदक की ओर से अधिवक्ता पंकज दुबे तथा अक्षय खंडेलवाल ने प्रभावी रूप से यह पक्ष रखा। 

 ट्रिब्यूनल द्वारा आपने आदेश से केंद्र सरकारऔर राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू करने के लिए आदेशित किया है ईवीएम यह प्रक्रिया पूर्ण करने के १२० दिन समय दिया गया है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
askari times