महिला पत्रकारों की कथित मारपीट के विरोध में इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कमिश्नर को सौंपा ज्ञापन
महिला पत्रकारों की गरिमा से समझौता बर्दाश्त नहीं - इरशाद कुरैशी
शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट की निष्पक्ष जांच सहित सात सूत्रीय मांगों को लेकर राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
पत्रकारों पर हिंसा जनता के जानने के अधिकार पर भी असर
ज्ञापन में कहा गया कि पत्रकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और उनके साथ किसी भी प्रकार की हिंसा, धमकी, उत्पीड़न अथवा समाचार कवरेज में बाधा केवल व्यक्तिगत अधिकारों का प्रश्न नहीं है। इसका असर जनता के जानने के अधिकार, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भी पड़ता है।
एसोसिएशन ने मांग की कि शाहीन खान और नफीसा खान के साथ हुई कथित मारपीट की घटना की निष्पक्ष, स्वतंत्र, पारदर्शी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की भूमिका दोषपूर्ण पाई जाती है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए।
महिला पत्रकारों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल की मांग
ज्ञापन में महिला पत्रकारों की गरिमा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ समाचार कवरेज, धरना-प्रदर्शन, घटनास्थल, सरकारी कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर पत्रकारों को निर्भीक होकर कार्य करने के लिए स्पष्ट सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने की मांग रखी गई।
संगठन ने कहा कि पत्रकारों पर हमला, धमकी, जबरन रोकने, कैमरा अथवा अन्य उपकरण छीनने, समाचार कवरेज में बाधा डालने या उत्पीड़न की शिकायत मिलने पर तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर समयबद्ध जांच की व्यवस्था होनी चाहिए।
संगठन ने पत्रकारों के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण, प्रतिशोधात्मक अथवा दबाव बनाने के उद्देश्य से दर्ज किए जाने वाले कथित झूठे मामलों की उच्चस्तरीय समीक्षा के लिए विशेष निगरानी तंत्र बनाने और आवश्यकता पड़ने पर पत्रकारों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की मांग भी की।
पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की उठी मांग
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने केंद्र सरकार से पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी और व्यावहारिक पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग की। संगठन का कहना है कि पत्रकारों पर हमले, धमकी, उत्पीड़न और दबाव की घटनाओं से निपटने के लिए स्पष्ट कानूनी व्यवस्था समय की आवश्यकता है।
दैनिक औरंगाबाद सिटीजन्स के संपादक एवं प्रदेश संरक्षक मराठवाड़ा इरशाद कुरैशी ने कहा कि महिला पत्रकारों की गरिमा, सुरक्षा और सम्मान से किसी भी परिस्थिति में समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने निष्पक्ष जांच और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई की मांग की।
‘पत्रकार असुरक्षित होगा तो सच कैसे सामने आएगा?’
प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा मोहम्मद ताबिश ने कहा कि पत्रकार जब किसी घटना की रिपोर्टिंग करता है तो वह समाज के सामने सच्चाई रखने का दायित्व निभाता है। यदि पत्रकार ही सुरक्षित नहीं रहेगा तो वह जनता की समस्याओं और शासन-प्रशासन से जुड़े मुद्दों को निर्भीक होकर कैसे सामने लाएगा।
उन्होंने कहा कि महिला पत्रकारों से जुड़ी इस घटना की निष्पक्ष जांच जरूरी है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए।
‘दबाव, धमकी और उपकरण छीनने जैसी शिकायतें गंभीर’
प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी ने कहा कि देशभर में पत्रकारों को कई तरह के दबाव, धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है। कई मामलों में समाचार कवरेज से रोकने, धमकाने अथवा उपकरण छीनने जैसी शिकायतें सामने आती हैं।
उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी कानूनी व्यवस्था बेहद जरूरी है और केंद्र सरकार को पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
अधिकार और सुरक्षा के सवाल पर पीछे नहीं हटेगा संगठन
जिला अध्यक्ष कलीमुद्दीन ने कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान के सवाल पर संगठन किसी भी स्तर पर पीछे नहीं हटेगा। पत्रकारों को अपने अधिकारों और सुरक्षा के लिए लोकतांत्रिक और कानूनी तरीके से एकजुट होकर आवाज उठानी होगी।
एडीएन न्यूज के हुसैन पटेल ने कहा कि घटनास्थल पर पत्रकार अक्सर जोखिम उठाकर समाचार और तस्वीरें जुटाते हैं। ऐसे में पुलिस एवं प्रशासन की जिम्मेदारी है कि पत्रकारों को सुरक्षित वातावरण मिले और समाचार संकलन के दौरान अनावश्यक बाधा न डाली जाए।
लोकमत के पत्रकार सलमान खान ने कहा कि पत्रकारिता का मूल उद्देश्य जनता तक तथ्य और सच्चाई पहुंचाना है। यदि पत्रकारों को धमकाया जाएगा या उन पर दबाव बनाया जाएगा तो इसका सीधा असर जनता तक पहुंचने वाली सूचनाओं पर पड़ेगा। उन्होंने पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण देने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
मांगें नहीं मानीं तो चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने कहा कि यदि पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो संगठन लोकतांत्रिक एवं कानूनी तरीके से देशभर के पत्रकारों को एकजुट कर चरणबद्ध आंदोलनात्मक कार्यक्रम चलाने पर विचार करेगा।
संगठन ने स्पष्ट किया कि उसका उद्देश्य किसी संस्था या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों, सुरक्षा, सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता की रक्षा सुनिश्चित करना है।
ज्ञापन सौंपने के दौरान पत्रकारों और संगठन के पदाधिकारियों ने शाहीन खान एवं नफीसा खान को न्याय, सुरक्षा और सम्मान दिलाने तथा पत्रकारिता की स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एकजुटता का संकल्प लिया।
बड़ी संख्या में पत्रकार और पदाधिकारी रहे मौजूद
कार्यक्रम में दैनिक औरंगाबाद सिटीजन्स के संपादक एवं प्रदेश संरक्षक मराठवाड़ा इरशाद कुरैशी, प्रदेश अध्यक्ष मराठवाड़ा मोहम्मद ताबिश, प्रदेश संगठन सचिव सैय्यद अनवर कादरी, औरंगाबाद टाइम्स के जिला अध्यक्ष कलीमुद्दीन, एडीएन न्यूज के हुसैन पटेल, लोकमत के सलमान खान, जिला संगठन सचिव सैय्यद जाकिर अहमद, जिला महासचिव अजीम खान सहित बड़ी संख्या में पत्रकार एवं संगठन के पदाधिकारी उपस्थित रहे।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने साफ संदेश दिया कि पत्रकारों को भयमुक्त वातावरण में काम करने का अवसर मिलना लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए आवश्यक है। अब इस मामले में जांच और प्रशासनिक कार्रवाई पर पत्रकार संगठनों की नजर बनी रहेगी।

