जबलपुर। आदिवासी बहुजन अधिकार कल्याण संघ (अबॉक्स) के प्रदेश अध्यक्ष देवेश चौधरी के नेतृत्व में शहर में “आरक्षण बचाओ-संविधान बचाओ महारैली” निकाली गई। आयोजकों के अनुसार सिविक सेंटर से शुरू हुई रैली मालवीय चौक, करमचंद चौक और बड़ी ओमती होते हुए घंटाघर कंट्रोल रूम पहुंची। रैली में एससी, एसटी और ओबीसी सहित विभिन्न समाजों के युवाओं, छात्र-छात्राओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।
रैली के दौरान “जय भीम”, “जय संविधान”, “जय बिरसा” और “जय जोहार” के नारे लगाए गए। समापन पर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम चार सूत्री ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने आरक्षण व्यवस्था तथा संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अपनी मांगें रखीं।
चार प्रमुख मांगें रखीं
ज्ञापन में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने की मांग की गई। इसके साथ उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव रोकने के लिए UGC के 2026 के इक्विटी नियमों को प्रभावी रूप से लागू करने की मांग भी उठाई गई।
यहां यह उल्लेखनीय है कि UGC ने University Grants Commission (Promotion of Equity in Higher Education Institutions) Regulations, 2026 को 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किया था। बाद में इन नियमों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई और केंद्र ने अगस्त 2026 में अदालत को बताया कि इनकी समीक्षा की जा रही है। OBC के 13 प्रतिशत लंबित पदों का मुद्दा भी उठा
प्रदर्शनकारियों ने मध्य प्रदेश में OBC के लिए 27 प्रतिशत आरक्षण लागू करने और 87:13 व्यवस्था के तहत रोके गए 13 प्रतिशत पदों का समाधान करने की मांग भी की। यह मुद्दा वर्तमान में न्यायिक विवाद से जुड़ा हुआ है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अप्रैल 2026 के एक आदेश में भी 14 और 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के प्रश्न को बड़ी पीठ के समक्ष लंबित बताया गया था।
हाल में 27 प्रतिशत OBC आरक्षण के तहत लंबित नियुक्तियों का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी उठा है और 13 प्रतिशत पदों के होल्ड रहने की व्यवस्था पर सार्वजनिक बहस जारी है।
एट्रोसिटी एक्ट को और प्रभावी बनाने की मांग
ज्ञापन की चौथी मांग में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 को और प्रभावी बनाने तथा कानून को लेकर गलत सूचना या भ्रामक प्रचार की शिकायतों पर प्रशासनिक कार्रवाई करने की मांग की गई।
आयोजकों ने कहा कि रैली का उद्देश्य आरक्षण और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से सरकार के समक्ष रखना है। कार्यक्रम में अनेक सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं और प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
