गोंडा, उत्तर प्रदेश।
इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन ® के राष्ट्रीय अध्यक्ष सेराज अहमद कुरैशी ने पत्रकार सत्यम मिश्रा पर हुए हमले की कड़ी शब्दों निंदा करते हुए कहा कि पत्रकारों की सुरक्षा केवल किसी संगठन की मांग नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मूल आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि पत्रकारों पर हमला करने वालों के खिलाफ त्वरित और निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी पत्रकार को समाचार कवरेज या जनहित की आवाज उठाने के कारण भयभीत करने की कोशिश स्वीकार्य नहीं होनी चाहिए। कुरैशी ने कहा कि प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि पत्रकार अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन बिना भय और दबाव के कर सकें। उन्होंने गोंडा पुलिस से मांग की कि मामले की गंभीरता को देखते हुए नामजद एवं अन्य संदिग्ध आरोपियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए तथा घायल पत्रकार के उपचार और सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि इंडियन जर्नलिस्ट एसोसिएशन पत्रकार सत्यम मिश्रा के साथ खड़ा है और पत्रकारों की सुरक्षा, सम्मान, स्वाभिमान एवं अधिकारों के लिए अपनी आवाज उठाता रहेगा।
पत्रकार पर हमले के बाद सबसे जरूरी है कि कानून अपना काम करे और पीड़ित को न्याय मिले। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ ऐसी कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए जिससे भविष्य में किसी पत्रकार, नागरिक या लोकतांत्रिक आवाज को हिंसा के जरिए दबाने का दुस्साहस न हो। क्योंकि कलम को लाठी से डराने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोकतंत्र में सवाल पूछने की जरूरत को खत्म नहीं किया जा सकता। लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की मजबूती का दावा करने वाली व्यवस्था के बीच यदि एक पत्रकार को दिनदहाड़े कचहरी के गेट के पास ही लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से हमला हो, तो सवाल सिर्फ एक पत्रकार की सुरक्षा का नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की सुरक्षा-व्यवस्था का भी है, जो नागरिकों को कानून का भरोसा दिलाती है।
गोंडा जिले में न्यूज पोर्टल ‘इंटरनेट की आवाज’ के पत्रकार सत्यम मिश्रा पर 25 सितंबर 2026 को हुआ हमला पत्रकारिता जगत के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया है। कोतवाली क्षेत्र में दीवानी कचहरी गेट के पास दोपहर करीब 2:30 बजे सत्यम मिश्रा अपने एक साथी के साथ चाय पी रहे थे। इसी दौरान लाठी-डंडों और धारदार हथियारों से लैस लोगों ने उन पर हमला कर दिया। हमले में पत्रकार सत्यम मिश्रा के सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आईं। उन्हें तत्काल गोंडा मेडिकल कॉलेज के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। पुलिस ने नौ लोगों के खिलाफ प्राथमिकी कर लिया है FIR दर्ज होना पहला कदम है, लेकिन गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाना उससे भी महत्वपूर्ण है।आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। घायल पत्रकार को आवश्यक सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
