सागर में जहरीली शराब से मौतों के पीछे भ्रष्टाचार बड़ा कारण होने का आरोप, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग
कांग्रेस नेताओं ने प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल, अवैध शराब कारोबार को कथित संरक्षण दिए जाने का आरोप
केंद्र और राज्य सरकार की ओर से नशे के खिलाफ अभियान चलाए जाने के दावों के बीच सागर जिले के बंडा क्षेत्र में जहरीली शराब पीने से हुई मौतों ने एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था और अवैध शराब कारोबार पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि अवैध नशे के कारोबार को रोकने में कथित भ्रष्टाचार और संरक्षण बड़ी बाधा बना हुआ है।
नशे का व्यापार सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा
बयान में कहा गया कि नशा और नशे का व्यापार सामाजिक व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा और चुनौती बन चुका है। इसके बावजूद अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री लगातार जारी रहने के आरोप सामने आ रहे हैं।
सवाल यह है कि यदि अवैध शराब का कारोबार खुलेआम चल रहा था, तो संबंधित विभागों और जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी कहां थी?
उज्जैन की पुरानी घटनाओं का भी किया जिक्र
संयुक्त बयान में पूर्व में उज्जैन सहित प्रदेश के अन्य हिस्सों में जहरीली शराब से हुई घटनाओं का भी उल्लेख किया गया। नेताओं ने सवाल उठाया कि पुराने मामलों की जांच और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया यदि समय पर और प्रभावी ढंग से पूरी होती, तो क्या ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता था?
“क्या पूरा प्रशासन और अधिक मौतों का इंतजार कर रहा है?” — बयान में उठाया गया सवाल
अवैध शराब कारोबार को कथित संरक्षण देने का आरोप
अल्पसंख्यक कांग्रेस परिवार के वरिष्ठ नेता सरदार दलवीर सिंह जस्सल और सुमन कुमार जैन ने संयुक्त बयान में आरोप लगाया कि प्रदेश में अवैध शराब की सप्लाई और बिक्री बड़े पैमाने पर जारी है।
उन्होंने आरोप लगाया कि कथित भ्रष्टाचार के कारण अवैध शराब कारोबारियों को संरक्षण मिलता है और इसी वजह से ऐसे कारोबार पर प्रभावी रोक नहीं लग पा रही।
भ्रष्टाचार, संरक्षण और प्रशासनिक लापरवाही से जुड़े ये आरोप नेताओं के संयुक्त बयान पर आधारित हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच और आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।
दोषियों पर कड़ी और ठोस कार्रवाई की मांग
दोनों नेताओं ने मांग की कि जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में केवल निचले स्तर पर कार्रवाई कर मामले को समाप्त न किया जाए, बल्कि सप्लाई चेन, अवैध विक्रेताओं, संभावित संरक्षणकर्ताओं और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच की जाए।
मांग है कि दोषी पाए जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर कड़ी से कड़ी और ठोस कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
जहरीली शराब से हुई मौतें केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और नागरिक सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न हैं। अब निगाह इस बात पर है कि जांच कितनी गहराई तक जाती है और जिम्मेदार लोगों पर किस स्तर की कार्रवाई होती है।
