हैदराबाद। भारतीय प्रवासी परिवारों में हो रहे सामाजिक और पारिवारिक बदलाव, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, सांस्कृतिक पहचान तथा नीतिगत चुनौतियों को लेकर हैदराबाद विश्वविद्यालय में एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं हितधारक परामर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से पहुंचे शिक्षाविदों, शोधकर्ताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रवासी भारतीय परिवारों से जुड़े मुद्दों पर मंथन किया।
कार्यक्रम का आयोजन गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS) द्वारा एस.आर.एम. विश्वविद्यालय दिल्ली-एनसीआर, सोनीपत के सहयोग से भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) समर्थित शोध परियोजना के अंतर्गत हैदराबाद विश्वविद्यालय के भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।
संविधान की प्रस्तावना के वाचन से शुरुआत
कार्यक्रम की शुरुआत अमृता विद्यालयम की शिक्षिका एवं कवयित्री गया बालाजी चुम्बले के नेतृत्व में संविधान की प्रस्तावना के सामूहिक वाचन से हुई। भारतीय प्रवासी अध्ययन केंद्र के प्रमुख प्रो. अजय के. साहू ने स्वागत उद्बोधन दिया, जबकि गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कार्यक्रम के उद्देश्य और सामाजिक प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला।
उद्घाटन सत्र की मुख्य अतिथि सामाजिक विज्ञान विद्यालय की अधिष्ठाता प्रो. के. सुनीता रानी रहीं। अध्यक्षता डॉ. बी.आर. आंबेडकर मुक्त विश्वविद्यालय के शिक्षा विभाग की प्रमुख प्रो. जी. मैरी सुनंदा ने की।
‘विकास-क्षितिज’ पुस्तक का हुआ विमोचन
कार्यक्रम में बिहार के डॉ. सुधांशु कुमार चक्रवर्ती द्वारा लिखित पुस्तक ‘विकास-क्षितिज’ का विमोचन किया गया। प्रो. जी. मैरी सुनंदा को शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए सावित्रीबाई फुले सम्मान प्रदान किया गया।
तकनीकी सत्रों में भारतीय प्रवासी परिवारों की बदलती संरचना, विदेशों में जन्मी और पली-बढ़ी नई पीढ़ी की भाषा एवं सांस्कृतिक पहचान, महिला सशक्तिकरण, विद्यार्थियों की समस्याएं, बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल, भूमि-संपत्ति विवाद, दस्तावेज संबंधी समस्याएं और कानूनी सहायता जैसे विषयों पर शोध-पत्र प्रस्तुत किए गए।
प्रवासियों को सिर्फ आर्थिक योगदान से न देखें: निमराजे
गोपाल किरन समाजसेवी संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने कहा कि भारतीय प्रवासियों को केवल विदेशी मुद्रा, निवेश अथवा आर्थिक योगदान के स्रोत के रूप में देखने के बजाय उन्हें शिक्षा, ज्ञान, तकनीक, उद्यमिता, शोध, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामाजिक विकास के भागीदार के रूप में समझने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्रवासी भारतीयों और उनके परिवारों के लिए संपत्ति विवाद, दस्तावेजी समस्याओं, धोखाधड़ीपूर्ण लेन-देन, कानूनी सहायता और आपात परिस्थितियों में अधिक प्रभावी संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता बताई।
‘गिरमिटिया’ नाटक ने दिखाई प्रवासी मजदूरों की पीड़ा
सांस्कृतिक कार्यक्रमों में डॉ. सुधांशु कुमार चक्रवर्ती की संकल्पना, निर्देशन और अभिनय में ‘गिरमिटिया’ नाटक का मंचन किया गया। छत्तीसगढ़ की अभिनेत्री भानुमति कौसर ने भी इसमें सहभागिता की। नाटक के माध्यम से प्रवासी मजदूरों के विस्थापन, श्रम और संघर्ष को प्रस्तुत किया गया।
बस्तर के लोक गायक गोपाल पोयम ने दंतेश्वरी पर आधारित लोकगीत प्रस्तुत किया, जबकि भरतनाट्यम की प्रस्तुति ने कार्यक्रम को सांस्कृतिक स्वरूप दिया।
सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 सम्मान प्रदान
समापन सत्र में सावित्रीबाई फुले ग्लोबल सुपर-30 शिक्षा उत्कृष्टता एवं प्रेरणा सम्मान-2026 समारोह आयोजित हुआ। इसमें शिक्षा, शोध, साहित्य, संस्कृति, सामाजिक सेवा और रचनात्मक कार्यों में योगदान देने वाले देश के विभिन्न राज्यों के चयनित प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर सावित्रीबाई फुले परिवार की पांचवीं पीढ़ी की वंशज डॉ. नूतन विष्णु लोणकर, डॉ. सीमा सूरी, डॉ. संदीप कुलश्रेष्ठ सहित अनेक शिक्षाविद् और शोधकर्ता उपस्थित रहे।
आयोजकों ने कहा कि विश्वविद्यालयों, सरकार, प्रवासी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद से प्रवासी भारतीय परिवारों से जुड़ी सामाजिक, पारिवारिक और नीतिगत चुनौतियों के समाधान की दिशा में प्रभावी पहल की जा सकती है।
