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जबलपुर मास्टर प्लान में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा—31 जनवरी के बाद क्या कार्रवाई हुई, कब होगा प्रकाशित?

जबलपुर। जबलपुर के नए मास्टर प्लान को लागू करने में लगातार हो रही देरी का मामला एक बार फिर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंचा है। अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि 31 जनवरी 2026 के बाद मास्टर प्लान को लेकर क्या कार्रवाई की गई और इसका प्रकाशन कब तक किया जाएगा। ताजा सुनवाई से जुड़ी प्रकाशित रिपोर्ट में भी हाईकोर्ट द्वारा निश्चित समय-सीमा बताने के लिए शपथपत्र पर जवाब मांगे जाने की जानकारी सामने आई है।



2021 में समाप्त हो चुका पुराना मास्टर प्लान

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच के डॉ. पी.जी. नाजपांडे और रजत भार्गव की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि जबलपुर शहर का पुराना मास्टर प्लान वर्ष 2021 में समाप्त हो चुका है, लेकिन नया मास्टर प्लान अब तक लागू नहीं किया गया। इस याचिका और पुराने मास्टर प्लान के 2021 में समाप्त होने के मुद्दे की पूर्व की अदालती कार्यवाही में भी पुष्टि होती है।

याचिका में यह मुद्दा भी उठाया गया कि वर्ष 2014 में जबलपुर शहर की सीमा में 62 नए गांव शामिल किए गए थे। नया मास्टर प्लान लागू नहीं होने से इन क्षेत्रों में नियोजित विकास और निर्माण संबंधी गतिविधियों को लेकर समस्याएं उत्पन्न होने का दावा किया गया है।

पहले भी मांगी गई थी प्रोग्रेस रिपोर्ट

मामले में हाईकोर्ट ने पूर्व में मास्टर प्लान की प्रगति को लेकर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए थे। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत के समक्ष कहा कि सरकार की ओर से पेश की गई कंप्लायंस रिपोर्ट में मास्टर प्लान शीघ्र लागू किए जाने की बात कही गई थी।

उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि 31 जनवरी 2026 को नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की ओर से मास्टर प्लान का प्रारूप तैयार होने और उसे आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया के लिए भेजे जाने की जानकारी दी गई थी। अप्रैल 2026 की एक प्रकाशित रिपोर्ट में भी 31 जनवरी को ड्राफ्ट प्रकाशन के लिए भेजे जाने का उल्लेख है।

आठ महीने बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं होने पर सवाल

याचिकाकर्ता पक्ष के अनुसार, इसके बाद करीब आठ महीने गुजरने के बावजूद मास्टर प्लान की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। अदालत ने इसी देरी पर संबंधित विभागों से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

ताजा सुनवाई से संबंधित प्रकाशित विवरण के मुताबिक अदालत ने संबंधित अधिकारियों से शपथपत्र पर यह बताने को कहा है कि मास्टर प्लान कब तक लागू होगा और आगे की प्रक्रिया क्या होगी।

नए मास्टर प्लान में हो रही देरी का मामला इससे पहले भी अदालत तक पहुंच चुका है। अगस्त 2026 में मास्टर प्लान के प्रकाशन में देरी को लेकर नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के आयुक्त एवं संचालक को अवमानना नोटिस जारी किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई थी।

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