ग्वालियर। गोपाल किरन समाजसेवी संस्था (GKSSS), ग्वालियर ने 23 सितंबर 2026 को ‘संकल्प दिवस’ के रूप में मनाते हुए बाबासाहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के बड़ौदा से जुड़े ऐतिहासिक अनुभवों को वर्तमान समाज में समानता, शिक्षा, आत्मसम्मान और मानवीय गरिमा की आवश्यकता से जोड़ा है। संस्था का कहना है कि यह अवसर केवल इतिहास को याद करने का नहीं, बल्कि भेदभाव-मुक्त और समान अवसर वाले समाज के निर्माण के प्रति सामाजिक जिम्मेदारी को समझने का भी है।
बड़ौदा में भेदभाव के अनुभव ने छोड़ी गहरी छाप
संस्था के अध्यक्ष श्रीप्रकाश सिंह निमराजे द्वारा प्रस्तुत आलेख में कहा गया है कि डॉ. आंबेडकर की उच्च शिक्षा में बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव गायकवाड़ का महत्वपूर्ण योगदान था। विदेश में उच्च शिक्षा के बाद भारत लौटकर बड़ौदा राज्य की सेवा के दौरान डॉ. आंबेडकर को जातिगत पहचान के कारण सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा। उनके बड़ौदा के अनुभवों का उल्लेख ‘Waiting for a Visa’ में भी मिलता है।
आलेख में 23 सितंबर 1917 से जुड़े इस प्रसंग को व्यक्तिगत पीड़ा को सामाजिक परिवर्तन के संकल्प में बदलने की प्रेरणा के रूप में प्रस्तुत किया गया है। आगे चलकर डॉ. आंबेडकर का सार्वजनिक जीवन शिक्षा, नागरिक अधिकार, राजनीतिक प्रतिनिधित्व, सामाजिक न्याय और अस्पृश्यता उन्मूलन जैसे व्यापक विषयों से जुड़ा।
संविधान से मिले अधिकार व्यवहार में भी दिखें
आलेख में संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16 और 17 का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि कानूनी समानता को सामाजिक व्यवहार में उतारना जरूरी है। समानता परिवार, विद्यालय, कार्यस्थल, प्रशासन और सार्वजनिक संस्थाओं में भी दिखाई देनी चाहिए।
शिक्षा में समान अवसर, वंचित समुदायों की उच्च शिक्षा में भागीदारी, रोजगार एवं आजीविका, महिलाओं की निर्णय प्रक्रिया में हिस्सेदारी, डिजिटल संसाधनों तक पहुंच, संवैधानिक जागरूकता और संस्थागत जवाबदेही को सामाजिक परिवर्तन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में रेखांकित किया गया है।
संकल्प दिवस पर पांच प्रमुख संकल्प
GKSSS ने इस अवसर पर पांच प्रमुख संकल्प सामने रखे हैं—जाति, जन्म, लिंग, धर्म, भाषा या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेदभाव नहीं करना; वंचित और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों की शिक्षा को सामाजिक जिम्मेदारी मानना; प्रत्येक व्यक्ति की गरिमा और आत्मसम्मान को महत्व देना; न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व जैसे संवैधानिक मूल्यों को व्यवहार में अपनाना तथा सामाजिक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं, परिवार, संस्था और कार्यस्थल से करना।
श्रीप्रकाश सिंह निमराजे ने संदेश में कहा है कि संकल्प केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे व्यक्तिगत आचरण, सामाजिक जिम्मेदारी और संस्थागत परिवर्तन का आधार बनाना होगा। संस्था ने संकल्प दिवस को अतीत के स्मरण के साथ वर्तमान समाज की समीक्षा और भविष्य के लिए समानता आधारित समाज बनाने के संकल्प से जोड़ने का आह्वान किया है।
