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नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार इसत्याक अहमद ने भारत–नेपाल संबंधों में जिम्मेदार पत्रकारिता की भूमिका पर दिया जोर



महाराष्ट्र में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में नेपाल का प्रतिनिधित्व करते हुए वरिष्ठ पत्रकार इसत्याक अहमद ने कहा— पत्रकारिता दोनों देशों के बीच संवाद, विश्वास और आपसी समझ का मजबूत सेतु है।

महाराष्ट्र। महाराष्ट्र की पावन धरती पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय पत्रकार सम्मेलन में नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार इसत्याक अहमद ने भारत और नेपाल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को मजबूत बनाने में पत्रकारिता की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने अपने संबोधन में दोनों देशों के पत्रकारों से स्वतंत्र, तथ्यपरक, संतुलित और जिम्मेदार पत्रकारिता को बढ़ावा देने का आह्वान किया।



सम्मेलन को संबोधित करते हुए इसत्याक अहमद ने ऑल इंडिया जर्नालिस्ट एसोसिएशन को आयोजन के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने नेपाल से आए पत्रकारों को सम्मानित किए जाने पर भी प्रसन्नता व्यक्त की।

उन्होंने कहा कि भारत और नेपाल का संबंध केवल दो पड़ोसी देशों का संबंध नहीं है, बल्कि दोनों देशों की जनता, परिवारों, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक परंपराओं के गहरे जुड़ाव का प्रतीक है। खुली सीमा, साझा सांस्कृतिक विरासत, व्यापार, धार्मिक आस्था और सामाजिक संबंध दोनों देशों को एक-दूसरे के बेहद करीब लाते हैं।

पत्रकारिता की भूमिका महत्वपूर्ण

इसत्याक अहमद ने कहा कि ऐसे घनिष्ठ संबंधों में पत्रकारिता की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है। पत्रकार केवल समाचारों का प्रसार करने वाला माध्यम नहीं है, बल्कि वह जनमत निर्माण तथा देशों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने कहा कि एक देश में प्रकाशित या प्रसारित समाचार दूसरे देश की जनता के राजनीतिक और कूटनीतिक दृष्टिकोण को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए भारत और नेपाल के पत्रकारों के बीच संबंध मजबूत, संतुलित और जिम्मेदार होना आवश्यक है।

फेक न्यूज से सतर्क रहने की अपील

सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में फेक न्यूज, अफवाह, अधूरी जानकारी और सनसनीखेज खबरें कई बार सामान्य विषयों को भी अनावश्यक राजनीतिक या कूटनीतिक विवाद में बदल देती हैं।

उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि संवेदनशील मुद्दों पर निर्भीक होकर सवाल उठाए जाएं, लेकिन समाचारों में तथ्यों, संदर्भों और दोनों देशों की संवेदनशीलताओं का पूरा ध्यान रखा जाए।

उन्होंने कहा कि पत्रकारिता किसी सरकार या राजनीतिक शक्ति का माध्यम नहीं, बल्कि जनता और सत्य के प्रति जवाबदेह माध्यम होनी चाहिए।

समानता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित हो भारत-नेपाल मैत्री

इसत्याक अहमद ने कहा कि नेपाल भारत के साथ मैत्रीपूर्ण संबंधों का पक्षधर है, लेकिन यह संबंध समानता, संप्रभुता, पारस्परिक सम्मान और विश्वास के आधार पर ही और मजबूत हो सकते हैं।

उन्होंने भारतीय पत्रकारिता से नेपाल को केवल एक छोटे पड़ोसी देश के रूप में नहीं, बल्कि अपनी स्वतंत्र पहचान और राष्ट्रीय आकांक्षाओं वाले एक संप्रभु राष्ट्र के रूप में देखने की अपेक्षा जताई। इसी तरह उन्होंने नेपाली पत्रकारों से भी भारत के प्रति तथ्यपरक, संतुलित और जिम्मेदार दृष्टिकोण अपनाने की अपील की।

संयुक्त पत्रकारिता और तथ्य-जांच सहयोग पर जोर

उन्होंने भारत और नेपाल के पत्रकारों के बीच नियमित संवाद, संयुक्त रिपोर्टिंग, पत्रकार आदान-प्रदान कार्यक्रम, तथ्य-जांच सहयोग तथा सीमा क्षेत्रों से जुड़े मुद्दों पर सहयोगात्मक पत्रकारिता को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयासों से दोनों देशों के बीच गलतफहमियां कम होंगी और जनता के बीच विश्वास और मजबूत होगा।

डॉ. मोहम्मद जाकिर हुसैन की ओर से भेजीं शुभकामनाएं

अपने संबोधन के दौरान इसत्याक अहमद ने नेपाल के वरिष्ठ पत्रकार, राजनीतिक विश्लेषक, लेखक एवं पूर्व मंत्री डॉ. मोहम्मद जाकिर हुसैन की ओर से भी सम्मेलन के आयोजकों और उपस्थित पत्रकारों को शुभकामनाएं प्रेषित कीं।

उन्होंने बताया कि डॉ. हुसैन को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया था, लेकिन एक राजनीतिक दल के महासचिव के रूप में पूर्व निर्धारित महत्वपूर्ण राजनीतिक एवं संगठनात्मक कार्यक्रमों के कारण वह इस बार सम्मेलन में उपस्थित नहीं हो सके। उन्होंने अपनी अनुपस्थिति पर खेद व्यक्त करते हुए सम्मेलन की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं और भविष्य के कार्यक्रमों में शामिल होने का प्रयास करने का आश्वासन दिया।

इसत्याक अहमद ने बताया कि डॉ. हुसैन के अत्यंत निकट मित्र सिराज अहमद कुरैशी के माध्यम से भी सम्मेलन की सफलता के लिए उनकी हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की गई हैं।

“पत्रकारिता सीमा नहीं, सेतु बनाए”

अपने संबोधन के अंत में इसत्याक अहमद ने कहा कि भारत और नेपाल के संबंधों को केवल दोनों देशों की सरकारें ही नहीं, बल्कि दोनों देशों की जनता भी मजबूत करती है और जनता के बीच विश्वास एवं संवाद स्थापित करने में पत्रकारिता की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।

उन्होंने पत्रकारों से आह्वान करते हुए कहा—

“आइए, हम ऐसी पत्रकारिता का संकल्प लें जो सीमा नहीं, सेतु बनाए; दूरी नहीं, संवाद स्थापित करे; भ्रम नहीं, सत्य को सामने लाए और तनाव नहीं, आपसी समझ को बढ़ावा दे।”

उन्होंने अंत में नेपाल–भारत मैत्री तथा स्वतंत्र एवं उत्तरदायी पत्रकारिता की जय का उद्घोष किया।

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