भोपाल। मध्य प्रदेश में दूध की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए मध्यप्रदेश राज्य सहकारी डेयरी फेडरेशन (एमपीसीडीएफ) ने बड़ा कदम उठाया है। अब प्रदेशभर में खरीदी केंद्रों से लेकर प्रोसेसिंग प्लांट तक दूध की पेस्टिसाइड, कीटनाशक (इन्सेक्टिसाइड) और अन्य हानिकारक रसायनों की आधुनिक मशीनों से जांच की जाएगी। यदि किसी किसान के दूध में निर्धारित सीमा से अधिक रसायन पाए गए तो उस कलेक्शन का पूरा लॉट तत्काल रिजेक्ट कर दिया जाएगा।
एमपीसीडीएफ ने इस संबंध में सभी दूध संग्रहण केंद्रों और कलेक्शन सेंटर संचालकों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। उद्देश्य उपभोक्ताओं तक पूरी तरह सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण दूध पहुंचाना है।
ढाई लाख किसानों के दूध की होगी निगरानी
प्रदेश में एमपीसीडीएफ प्रतिदिन ढाई लाख से अधिक दुग्ध उत्पादक किसानों से करीब 10 लाख लीटर दूध एकत्र करता है। अब फेडरेशन का फोकस केवल दूध संग्रह बढ़ाने पर नहीं, बल्कि उसकी गुणवत्ता सुधारने पर भी है। इसके लिए प्रदेशभर में 40 स्थानों पर आधुनिक गुणवत्ता जांच व्यवस्था विकसित की गई है।
यदि किसी क्षेत्र से रसायनयुक्त दूध मिलने की शिकायत आती है तो जांच सीधे संबंधित किसान तक पहुंचाई जाएगी। जांच में दोषी पाए जाने पर संबंधित किसान से दूध की खरीदी भी बंद की जा सकती है।
डिजिटल मशीनें बताएंगी दूध की गुणवत्ता
अब प्रत्येक खरीदी, संग्रहण और चिलिंग सेंटर पर डिजिटल गुणवत्ता जांच मशीनें लगाई गई हैं। ये मशीनें दूध का वजन, फैट, एसएनएफ सहित अन्य गुणवत्ता मानकों की जांच कर मोबाइल ऐप के जरिए तुरंत ऑनलाइन रिकॉर्ड उपलब्ध कराएंगी। साथ ही दूध में मानक से अधिक रसायनों की मौजूदगी का भी तत्काल पता चल सकेगा।
इस हाईटेक व्यवस्था की शुरुआत उज्जैन से की गई थी, जिसे अब पूरे मध्य प्रदेश में लागू किया जा रहा है।
दूध उत्पादन बढ़ाने पर भी फोकस
प्रदेश में वर्तमान में प्रति गोवंश औसतन 4.5 लीटर प्रतिदिन दूध उत्पादन हो रहा है। सरकार ने इसे बढ़ाकर 6.5 लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके लिए नस्ल सुधार, उच्च गुणवत्ता वाले गोवंश उपलब्ध कराने और दुग्ध उत्पादकों को ऋण सुविधा देने की योजना तैयार की जा रही है।
पांच साल में 50 लाख लीटर प्रतिदिन होगी प्रोसेसिंग क्षमता
फिलहाल मध्य प्रदेश में दूध प्रोसेसिंग की क्षमता 18 लाख लीटर प्रतिदिन है, जबकि औसतन 10 लाख लीटर दूध का प्रसंस्करण किया जा रहा है। एमपीसीडीएफ ने अगले पांच वर्षों में प्रोसेसिंग क्षमता बढ़ाकर 50 लाख लीटर प्रतिदिन करने का लक्ष्य रखा है।
वर्तमान में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन और सागर में बड़े डेयरी प्रोसेसिंग प्लांट संचालित हैं। इसके अलावा प्रदेश में 11 मिनी डेयरी प्लांट भी कार्यरत हैं।
किसानों को किया जा रहा जागरूक
एमपीसीडीएफ के प्रबंध संचालक डॉ. संजय गोवानी ने बताया कि कलेक्शन सेंटरों पर आधुनिक मशीनों के माध्यम से दूध की गुणवत्ता की लगातार निगरानी की जा रही है। किसानों को भी जागरूक किया जा रहा है कि वे दुधारू पशुओं को पेस्टिसाइड या कीटनाशक युक्त चारा न खिलाएं और दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसी भी प्रकार के हार्मोन, इंजेक्शन या अवैध दवाओं का उपयोग न करें।
उन्होंने बताया कि अब तक जांच के दौरान किसी भी दूध के नमूने में हानिकारक रसायन नहीं मिले हैं। नई व्यवस्था से गुणवत्तापूर्ण दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ किसानों को उनकी गुणवत्ता के अनुरूप उचित मूल्य भी सुनिश्चित किया जा रहा है।
