जबलपुर। संस्कारधानी की जीवनदायिनी नर्मदा नदी इन दिनों अपने सबसे निचले जलस्तर पर पहुंचती नजर आ रही है। मानसून की कमजोर शुरुआत और लगातार कम बारिश के कारण नदी का जलस्तर तेजी से घटा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि जिन स्थानों तक पहले नाव के बिना पहुंचना संभव नहीं था, वहां अब लोग पैदल ही नदी पार कर रहे हैं। यह जोखिम भरा शौक अब जानलेवा साबित होने लगा है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, इस तरह की लापरवाही के चलते अब तक पांच लोगों की मौत हो चुकी है।
घाटों पर उमड़ रही भीड़, बढ़ रहा खतरा
भीषण गर्मी और नदी में कम पानी होने के कारण बड़ी संख्या में लोग ग्वारीघाट, जिलहरी घाट, तिलवारा घाट और दादा घाट जैसे प्रमुख घाटों पर स्नान और घूमने पहुंच रहे हैं। कई लोग कम पानी का फायदा उठाकर नदी के बीच तक पैदल चले जा रहे हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बढ़ रही है।
20 साल में पहली बार ऐसा नजारा
नर्मदा पूजन के लिए ग्वारीघाट पहुंचीं श्रद्धालु अनामिका ठाकुर बताती हैं कि वह पिछले दो दशकों से नियमित रूप से नर्मदा स्नान और पूजा के लिए आती रही हैं, लेकिन उन्होंने नदी का जलस्तर कभी इतना कम नहीं देखा। उनका कहना है कि पहले नदी के मध्य स्थित मंदिर तक पहुंचने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता था, जबकि अब श्रद्धालु पैदल ही वहां तक पहुंच रहे हैं।
गंदे नालों की खुली पोल
जलस्तर कम होने का एक और गंभीर असर सामने आया है। नदी में गिरने वाले कई गंदे नालों के मुहाने अब पूरी तरह दिखाई देने लगे हैं। इससे यह स्पष्ट हो गया है कि शहर का दूषित पानी सीधे नर्मदा में मिल रहा है, जो नदी की स्वच्छता और पर्यावरण के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन और लोगों के सामने बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही अच्छी बारिश नहीं हुई तो नर्मदा का जलस्तर और गिर सकता है। ऐसे में प्रशासन के सामने एक ओर नदी संरक्षण की चुनौती है, तो दूसरी ओर लोगों को जोखिम भरे तरीके से नदी पार करने से रोकना भी बड़ी जिम्मेदारी बन गई है। वहीं पर्यावरणविदों का कहना है कि नर्मदा में गिर रहे गंदे नालों को रोकने के लिए भी तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।
