नई दिल्ली। मोटर दुर्घटना मामलों में मुआवजे के निर्धारण को अधिक पारदर्शी और एकरूप बनाने की दिशा में उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। अदालत ने स्पष्ट किया कि मृतक या घायल दावेदार की वार्षिक आय तय करने के लिए आयकर रिटर्न (आईटीआर) को प्रमुख आधार माना जाएगा। साथ ही वेतनभोगी और स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के लिए अलग-अलग मानदंड भी निर्धारित किए गए हैं।
दो सदस्यीय पीठ न्यायमूर्ति संजय करोल और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह ने कहा कि मोटर वाहन अधिनियम के तहत मुआवजे की गणना के लिए कोई एक निश्चित फार्मूला नहीं हो सकता, लेकिन आयकर रिटर्न एक वैधानिक दस्तावेज है, जो किसी व्यक्ति की आय का विश्वसनीय आधार प्रदान करता है।
वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए पिछले वर्ष का ITR ही पर्याप्त
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि वेतनभोगी कर्मचारियों की वार्षिक आय निर्धारित करने के लिए दुर्घटना से पहले के पिछले एक वर्ष का आयकर रिटर्न पर्याप्त माना जाएगा। अदालत के अनुसार, वेतनभोगी कर्मचारियों की आय में पदोन्नति या वेतन वृद्धि का प्रभाव नवीनतम आईटीआर में ही स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।
हालांकि, यदि दुर्घटना से ठीक पहले पदोन्नति या वेतन संशोधन हुआ हो और उसका पूरा प्रभाव आईटीआर में दर्ज न हो, तो अदालतें पदोन्नति पत्र, वेतन अभिलेख और अन्य वित्तीय दस्तावेजों को भी ध्यान में रख सकती हैं।
स्वरोजगार करने वालों के लिए तीन वर्षों की औसत आय होगी आधार
सुप्रीम कोर्ट ने स्वरोजगार करने वाले व्यक्तियों के मामले में कहा कि उनकी आय में उतार-चढ़ाव स्वाभाविक होता है। ऐसे में पिछले तीन वर्षों तक दाखिल किए गए आयकर रिटर्न में दर्शाई गई आय का औसत वार्षिक आय का आधार माना जाना चाहिए।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति ने केवल एक या दो वर्षों का ही आईटीआर दाखिल किया है, तो ऐसी स्थिति में उपलब्ध वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य परिस्थितियों को भी ध्यान में रखकर आय का आकलन किया जा सकता है।
'कोई सख्त और निश्चित नियम नहीं हो सकता'
न्यायमूर्ति संजय करोल ने फैसले में कहा कि मृतक या घायल व्यक्ति की वार्षिक आय निर्धारित करने के लिए कोई कठोर और सार्वभौमिक नियम नहीं बनाया जा सकता। हालांकि, आयकर रिटर्न एक वैधानिक दस्तावेज होने के कारण मुआवजा तय करने में सबसे महत्वपूर्ण संदर्भ बिंदु रहेगा।
बीमा कंपनी के खिलाफ अपील पर आया फैसला
यह महत्वपूर्ण निर्णय निर्माण व्यवसायी रश्मिरेखा त्रिपाठी के परिवार की ओर से श्रीराम जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के खिलाफ दायर अपील की सुनवाई के दौरान सुनाया गया।
