जबलपुर कोर्ट का सख्त फैसला: चेक बाउंस मामले में आरोपी को जेल, ब्याज समेत भुगतान का आदेश



जबलपुर। उधार ली गई राशि लौटाने के लिए जारी किया गया चेक बाउंस होना एक आरोपी को महंगा पड़ गया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी वंदना सोनी की अदालत ने परक्राम्य लिखत अधिनियम (Negotiable Instruments Act) की धारा 138 के तहत आरोपी अर्पण सिंह को दोषी ठहराते हुए तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही अदालत ने पीड़ित नीरज मिश्रा को मूल राशि, ब्याज और वाद व्यय सहित 1 लाख 46 हजार 200 रुपये का भुगतान करने के निर्देश दिए हैं।
विवाह खर्च के लिए लिया था उधार, चेक हुआ बाउंस

अदालत में प्रस्तुत तथ्यों के अनुसार, आरोपी ने विवाह खर्च के लिए 80 हजार रुपये उधार लिए थे। राशि लौटाने के लिए उसने 80 हजार रुपये का चेक जारी किया, लेकिन बैंक में प्रस्तुत करने पर चेक अपर्याप्त राशि (Insufficient Funds) और हस्ताक्षर भिन्न (Signature Differs) होने के कारण अनादृत हो गया।

शिकायतकर्ता द्वारा विधि अनुसार कानूनी नोटिस भेजे जाने के बावजूद आरोपी ने निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया, जिसके बाद मामला न्यायालय पहुंचा।
बचाव में कोई ठोस साक्ष्य पेश नहीं कर सका आरोपी

सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता ने कानून के तहत निर्धारित सभी औपचारिकताओं का पालन किया, जबकि आरोपी अपने बचाव में कोई विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके आधार पर न्यायालय ने उसे दोषी ठहराते हुए तीन माह के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।

साथ ही अदालत ने आरोपी को 80 हजार रुपये की मूल राशि, लगभग नौ वर्षों के लिए 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित कुल 1 लाख 44 हजार 200 रुपये तथा 2 हजार रुपये वाद व्यय का भुगतान करने का आदेश दिया।
अदालत की सख्त टिप्पणी

अपने फैसले में न्यायिक मजिस्ट्रेट ने कहा कि "चेक केवल कागज का टुकड़ा नहीं, बल्कि वित्तीय विश्वास का दस्तावेज है।" अदालत ने स्पष्ट किया कि चेक जारी करने वाला व्यक्ति भुगतान की जिम्मेदारी से बच नहीं सकता।
हस्ताक्षर अलग होने पर भी लागू होगी धारा 138

निर्णय में अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि चेक हस्ताक्षर भिन्न होने के कारण भी बैंक से लौटता है, तब भी वह परक्राम्य लिखत अधिनियम की धारा 138 के दायरे से बाहर नहीं माना जाएगा। यह फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण संदेश है, जो चेक जारी कर बाद में भुगतान से बचने की कोशिश करते हैं।

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