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एमपी में फिर महंगी हुई बिजली: जुलाई से बढ़ेगा बिल, 2 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ

 



एफसीपीपीए सरचार्ज 1.11% से बढ़कर 3.77% हुआ, 200-300 यूनिट खर्च करने वालों को 35 से 87 रुपए तक अधिक बिल; बढ़ती मांग और कम बारिश से संकट गहराया

जबलपुर। मध्यप्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं को एक बार फिर महंगाई का झटका लगा है। प्रदेश की बिजली वितरण कंपनियों ने फ्यूल कॉस्ट एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट (FCPPA) के तहत बिजली बिलों पर लगने वाला सरचार्ज बढ़ा दिया है। इसके चलते आगामी बिजली बिलों में उपभोक्ताओं को पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना होगा। इस फैसले का असर प्रदेश के दो करोड़ से अधिक बिजली उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।

बिजली कंपनियों के अनुसार ईंधन की बढ़ती लागत और बिजली खरीद पर बढ़े खर्च के कारण सरचार्ज में वृद्धि की गई है। नए आदेश के तहत एफसीपीपीए सरचार्ज 1.11 प्रतिशत से बढ़ाकर 3.77 प्रतिशत कर दिया गया है। यानी उपभोक्ताओं पर अब 2.66 प्रतिशत अतिरिक्त सरचार्ज का बोझ पड़ेगा। यह सरचार्ज बिजली बिल के एनर्जी चार्ज पर लागू होगा।

200 से 300 यूनिट पर बढ़ेगा बिल

नई व्यवस्था के अनुसार 200 से 300 यूनिट तक बिजली की खपत करने वाले घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में 35 से 87 रुपए तक की अतिरिक्त वृद्धि देखने को मिल सकती है। बढ़े हुए सरचार्ज का असर जुलाई 2026 के बिजली बिलों में दिखाई देगा।

रेगुलेशन-2021 के तहत जारी हुआ आदेश

एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी द्वारा जारी आदेश में कहा गया है कि जुलाई 2026 के लिए फ्यूल एवं पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज 3.77 प्रतिशत निर्धारित किया गया है। यह निर्णय टैरिफ रेगुलेशन-2021 एवं उसके संशोधित प्रावधानों के तहत लिया गया है।

कम बारिश से बिजली उत्पादन प्रभावित

प्रदेश में सामान्य से कम बारिश का असर अब बिजली उत्पादन पर भी दिखाई देने लगा है। जलाशयों में जलस्तर घटने के कारण कई बिजली परियोजनाओं का उत्पादन प्रभावित हुआ है। इसका असर ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति पर भी पड़ रहा है। कई इलाकों में रात के समय 6 से 8 घंटे तक बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। जबलपुर और आसपास के जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में भी रुक-रुक कर बिजली गुल होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

एक साल में 37 प्रतिशत बढ़ी बिजली की मांग

आंकड़ों के मुताबिक, 27 जुलाई 2025 को प्रदेश में बिजली की अधिकतम मांग 10,024 मेगावाट थी, जो 27 जुलाई 2026 को बढ़कर 13,757 मेगावाट पहुंच गई। यानी महज एक वर्ष में बिजली की मांग में करीब 37 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती मांग, कम वर्षा और उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण आने वाले समय में बिजली व्यवस्था पर और दबाव बढ़ सकता है।

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