सिख संगत ने किया तख्त श्रीहजूर साहिब नांदेड़ एक्ट 2026 का विरोध


जबलपुर। महाराष्ट्र सरकार द्वारा सिक्खों के पांच पवित्र तख्तों में से एक तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब, अबचल नगर, नांदेड़ गुरुद्वारा एक्ट 1956 को समाप्त कर उसके स्थान पर गुरुद्वारा एक्ट 2026 लागू करने के प्रस्ताव के विरोध में जबलपुर सिक्ख संगत के नेतृत्व में समूह सिक्ख संगत की एक महत्वपूर्ण बैठक गुरुद्वारा  माइयां, नेपियर टाउन में आयोजित की गई। जिसमें नए  एक्ट पर गहरी आपत्ति व्यक्त करते हुए इसे सिक्ख समाज की धार्मिक भावनाओं एवं ऐतिहासिक परंपराओं के खिलाफ  बताया गया।

बैठक को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता एनएस रूपराह एवं अधिवक्ता जेपीएस ओबेरॉय ने प्रस्तावित एक्ट के संवैधानिक पहलुओं का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि वर्तमान एक्ट 1956 तथा प्रस्तावित एक्ट 2026 के प्रावधानों में महत्वपूर्ण परिवर्तन प्रस्तावित हैं, जिनका व्यापक प्रभाव तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब के प्रबंधन एवं परंपरागत व्यवस्था पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे विषय पर संबंधित धार्मिक संस्थाओं एवं सिक्ख समाज से व्यापक विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है।

बैठक में उपस्थित वरिष्ठ सिक्ख प्रतिनिधियों ने अपने विचार रखते हुए कहा कि तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब सम्पूर्ण सिक्ख पंथ की सर्वोच्च धार्मिक संस्थाओं में से एक है तथा इसकी मर्यादा, परंपराएं एवं स्वायत्तता सिक्ख समाज की अमूल्य धरोहर हैं। इस मौके पर जबलपुर सिक्ख संगत के अध्यक्ष  हरेन्द्रजीत सिंह बब्बू,  मंजीत सिंह बेदी एवं दलबीर सिंह जस्सल ने कहा कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी), श्री अकाल तख्त के सिंह साहिबान तथा अन्य पंथक संस्थाओं से बिना व्यापक परामर्श किए किसी भी नए कानून को लागू करना उचित नहीं है।

संगत ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर मांग की कि हज़ूर साहिब एक्ट 1956 को यथावत रखा जाए तथा प्रस्तावित गुरुद्वारा एक्ट 2026 पर तत्काल पुनर्विचार किया जाये।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार एवं अन्य संबंधित संवैधानिक पदाधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित एक्ट के प्रति सिक्ख समाज की आपत्ति एवं विरोध से अवगत कराया जाएगा। संगत ने कहा कि यह विषय किसी राजनीतिक विवाद का नहीं, बल्कि करोड़ों सिक्ख श्रद्धालुओं की आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता, संवैधानिक अधिकारों एवं ऐतिहासिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

बैठक के अंत में उपस्थित संगत ने एक स्वर में कहा कि तख्त सचखंड श्री हज़ूर साहिब की गरिमा, परंपराओं एवं स्वायत्तता की रक्षा के लिए समाज लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक दायरे में रहकर अपना पक्ष मजबूती से रखेगा तथा सरकार से अपेक्षा करता है कि वह सिक्ख समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रस्तावित एक्ट पर पुनर्विचार करेगी।

बैठक में सिख समाज की धार्मिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक संस्थाओं के पदाधिकारीगण उपस्थित रहे ।

जानकारी के अनुसार फिलहाल महाराष्ट्र सरकार ने भारी विरोध को देखते हुए उक्त एक्ट को स्थगित कर दिया है और विचार विमर्श हेतु एक कमेटी का गठन किया गया है । कमेटी सिख समाज से वार्तालाप करेगी ।

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