जबलपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के माध्यम से ओपन स्कूल से डीएलएड (डिप्लोमा इन एलीमेंट्री एजुकेशन) की डिग्री प्राप्त कर प्राथमिक शिक्षक बने जबलपुर सहित मध्यप्रदेश के 10 हजार से अधिक शिक्षकों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है। नेशनल काउंसिल फॉर टीचर एजुकेशन (एनसीटीई) के नियमों के अनुसार डीएलएड का न्यूनतम पाठ्यक्रम दो वर्ष का होना अनिवार्य है, जबकि संबंधित ओपन स्कूल का पाठ्यक्रम मात्र 18 माह का था। ऐसे में इस डिग्री की वैधता पर सवाल उठने के बाद हजारों शिक्षकों का भविष्य अधर में लटक गया है।
दस्तावेज सत्यापन के दौरान सामने आया मामला
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा नियुक्त शिक्षकों की सूची जारी किए जाने के बाद प्रदेशभर में उनके शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन किया जा रहा है। खंडवा सहित कई जिलों में चल रही इस प्रक्रिया के दौरान वर्ष 2017 से 2019 के बीच ओपन स्कूल से डीएलएड करने वाले शिक्षकों की डिग्री एनसीटीई के मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई। इसके बाद संबंधित डिग्री की मान्यता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
एनसीटीई के नियमों से मेल नहीं खाता पाठ्यक्रम
जानकारी के अनुसार, एनसीटीई के नियमानुसार प्राथमिक शिक्षक बनने के लिए डीएलएड का पाठ्यक्रम कम से कम दो वर्ष का होना चाहिए। लेकिन जिन शिक्षकों ने ओपन स्कूल के माध्यम से प्रशिक्षण प्राप्त किया, उनका कोर्स केवल 18 माह का था। इसी कारण इस डिग्री को मान्य न मानने की स्थिति उत्पन्न हुई है।
हजारों शिक्षकों में बढ़ी चिंता
डिग्री की वैधता पर सवाल उठने के बाद प्रदेशभर के हजारों शिक्षकों में चिंता का माहौल है। यदि शासन द्वारा इस डिग्री को अमान्य घोषित किया जाता है, तो इसका सीधा असर इन शिक्षकों की सेवा पर पड़ सकता है। कई शिक्षक वर्षों से सरकारी स्कूलों में कार्यरत हैं और अब उनके रोजगार पर संकट गहराता नजर आ रहा है।
शासन के फैसले पर टिकी निगाहें
खंडवा सहित विभिन्न जिलों में दस्तावेज सत्यापन की प्रक्रिया जारी है। अंतिम निर्णय राज्य शासन के स्तर पर लिया जाना है। ऐसे में प्रभावित शिक्षक शासन से राहत की उम्मीद लगाए बैठे हैं। आने वाले दिनों में सरकार का फैसला हजारों शिक्षकों के भविष्य की दिशा तय करेगा।
