जबलपुर। भारत की स्वतंत्रता के दशकों बाद भी देश में नागरिकता को प्रमाणित करने वाले किसी एक सर्वमान्य और ठोस दस्तावेज का ना होना अत्यंत चिंता का विषय है। वर्तमान में पासपोर्ट, मतदाता पहचान पत्र या आधार कार्ड या राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, पैन कार्ड, जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र, आय प्रमाण प्रमाण पत्र, मूल निवासी प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों को भी नागरिकता का प्रमाण मानने में संशय की स्थिति बना दी गई है। यह अनिश्चितता आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा करती है। यह बात अल्पसंख्यक कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सरदार दलवीर सिंह जस्सल, सुमन कुमार जैन ने जारी एक संयुक्त बयान में व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि कोई भी अवैध प्रवासी आसानी से सभी दस्तावेज बना कर भारत का नागरिक कहला रहा है। जब खुल्लम खुल्ला सरकार यह कहती हैं की आधार कार्ड, मतदाता सूची,मतदाता पत्र,राशन कार्ड नागरिकता के प्रमाण नहीं है तो सरकार ही बताएं की नागरिकता का अकाट्य दस्तावेज कौन सा है।
अल्पसंख्यक कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने केंद्र सरकार से कहा कि वह प्रत्येक नागरिक के मूल अधिकारों की रक्षा के लिए वह बताएं की प्रमाणित और अकाट्य दस्तावेज कौन सा है।
जैसे कि विदेशों में नागरिकता प्रमाण पत्र पासपोर्ट को ही माना जाता है, किंतु भारत में ऐसा नहीं हो रहा है। जिससे घुसपैठ की समस्या भी बनी हुई है फर्जी नागरिकों की पहचान और उनका निष्कासन भी समस्या बना हुआ है। राष्ट्रीय सुरक्षा के मध्य नजर सरकार को इससे समझौता न करते हुए यह बात बतानी चाहिए कि नागरिकता का प्रमाण पत्र कौन सा होता है।
