श्याम बहादुर साहू द्वारा दायर आपराधिक अपील को खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट द्वारा दी गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है।
यह निर्णय न्यायमूर्ति विवेक कुमार सिंह एवं न्यायमूर्ति अजय कुमार निरंकारी की खंडपीठ द्वारा सुनाया गया। आरोपी की ओर से अधिवक्ता राम प्रकाश यादव ने पैरवी की, जबकि राज्य शासन की ओर से यश सोनी, उप महाधिवक्ता उपस्थित रहे।
राज्य की ओर से दलील दी गई कि प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के बयान स्पष्ट रूप से यह सिद्ध करते हैं कि आरोपी श्याम बहादुर साहू ने मृतक को पकड़कर रखा, जिससे सह-आरोपी द्वारा उस पर जानलेवा हमला किया जा सके। इस प्रकार आरोपी की भूमिका सामान्य आशय (कॉमन इंटेंशन) में पूर्ण रूप से स्थापित होती है और उस पर धारा 34 भा.दं.सं. का पूर्ण रूप से प्रयोग लागू होता है।
मामले के अनुसार, वर्ष 2010 में नंद किशोर कोल को भोजन के बहाने बुलाकर उसके हाथ बांधे गए और कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या कर दी गई थी। ट्रायल कोर्ट ने श्याम बहादुर साहू को धारा 302/34 आईपीसी के तहत दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। सभी साक्ष्यों और दलीलों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के विरुद्ध अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने में सफल रहा है तथा निचली अदालत के फैसले में कोई कानूनी त्रुटि नहीं पाई गई। परिणामस्वरूप, अपील निरस्त कर दी गई।