जबलपुर। ग्वालियर के वकील अनिल कुमार मिश्रा, अमित दुबे, ध्यानेन्द्र कांकरिया, गौरव व्यास, अमित भदोरिया एवं अन्य लोगो द्वारा बाबा साहिब डॉ. भीम रॉव अम्बेडकर की फोटो को सार्वजानिक रूप से जलाकर पैरो से कुचलने तथा जाति विशेष के संवंध में अनर्गल तथा आपत्ति जनक रूप से अपमानजनक कृत्य के विरूद्ध ग्वालियर क्राइम ब्रांच द्वारा अपरोक्त आरोपियों के विरूद्ध भारतीय न्याय सहित 2023 की धारा 223(b), 196(1)(a), 196(1)(b), 343(1)(c ) 353(2), 190 तथा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जन जाति अधिनियम 1989 की धारा 3(1)(v) तथा धारा 3(1)(u) के तहत मामला पंजिवद्ध करके आरोपी अधिवक्ताओ को जेल भेज दिया गया है | पुलिस द्वारा की गई कार्यवाही के संवंध में आरोपियों ने जमानत हेतु जिला न्यायालय ग्वालियर में आवेदन दाखिल किया गया था जिसे जिला न्यायालय द्वारा आरोपियों के कृत्य को दृष्टिगत रखते हुए कहा गया की यदि आरोपियों को जमानत का लाभ दिया जाता है तो वर्ग संघर्ष जैसी स्थिति निर्मित हो सकती है तथा जमानत पर रिहा करने से साफ़ इनकार कर दिया गया तथा सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है | तब आरोपी अधिवक्ता अनिल मिश्रा की ओर से ग्वालियर हाईकोर्ट में दिनांक 02/01/26 को एक रिट पिटीशन क्रमांक 02/2026 दायर की गई जिसमे गिरफ्तारी की संवैधानिकता को चुनोती दी गई | उक्त याचिका की हाईकोर्ट की छुट्टी के दिन शनिवार दिनांक 03.01.26 को स्पेशल बैंच गठित कर सुनवाई की गई | सुनवाई के दौरान जस्टिस जी.एस. अहलूवालिया तथा जस्टिस आशीष श्रोत्रि द्वारा याचिका की प्रारंभिक सुनवाई की गई | खंडपीठ द्वारा नोटिस जारी कर शिकायत कर्ताओ को पक्षकार बनाने के निर्देश दिए गए तथा महाधिवक्ता को जबाब दाखिल करने हेतु एक दिन का समय दिया गया तथा याचिका की सुनवाई दिनांक 04.01.26 दिन रविवार को 11 बजे से नियत की गई | आज दिनांक 4/1/26 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया की शिकाएतकर्ता मकरंद बौद्ध, केशव अहिरवार, रवि ककोरिया, स्वन्त्रत जाटव है | जिनमे से किसी भी शिकायत कर्ताओ को नोटिस तामील नही किया गया है तथा याचिका में केवल एक व्यक्ति मकरंद बौद्ध को ही पक्षकार बनाया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट द्वारा हरिराम भाम्भ वनाम सत्यनारायण के प्रकरण में मार्गदर्शी सिधांत प्रतिपादित किए गए है की शिकायत कर्ता को सुनवाई का मौका दिए बिना आरोपियों को जमानत का लाभ नही दिया जाना चाहिए | सुनवाई के दौरान अनेक सामाजिक संगठनो की और से हत्क्षेप याचिकाए भी दाखिल करके याचिका की बिचरण शीलता को प्रश्नगत किया गया है | हत्क्षेप कर्ताओ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता रामेश्वर सिंह ठाकुर, प्रह्लाद चौधरी, वरुण ठाकुर, विनायक प्रसाद शाह, अशोक कुमार बैन, पुष्पेन्द्र शाह, विश्वजीत रतोनिया, रामकरण प्रजापति, हनुमत लोधी ने पक्ष रखा | सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट द्वारा मामले को दिनांक 05/01/26 को नियमित कोर्ट के समक्ष सुनवाई किए जाने का आदेश पारित किया गया | तथा शिकाएत कर्ताओ को नोटिस की तामीली सहित केस डायरी प्रस्तुत करने के भी निर्देश दिए गए |
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