बिजली विभाग की मनमानी पर जनता परेशान, पुलिस की तैनाती ने बढ़ाए सवाल
जबलपुर के रद्दी चौकी क्षेत्र में इन दिनों बिजली विभाग द्वारा लगाए जा रहे स्मार्ट मीटर लोगों के लिए राहत नहीं, बल्कि नई मुसीबत बनते जा रहे हैं। दर्जनों पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में मीटर लगाए जाना यह साफ संकेत देता है कि यह काम जनसहमति से नहीं, बल्कि दबाव और डर के माहौल में किया जा रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि स्मार्ट मीटर लगते ही उनके बिजली बिल कई गुना बढ़ गए, जबकि बिजली खपत में कोई खास बदलाव नहीं हुआ। सवाल यह है कि अगर यह योजना जनता के हित में है, तो फिर पुलिस बल की जरूरत क्यों पड़ी?
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब क्षेत्रीय विधायक लखन घनघोरिया स्वयं मौके पर पहुंचे और अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। विधायक ने साफ शब्दों में कहा कि बिना जनता की सहमति और भरोसे के कोई भी योजना थोपना लोकतंत्र के खिलाफ है।
सबसे बड़ा सवाल बिजली विभाग से यह है कि
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स्मार्ट मीटर लगाने से पहले जनता को सही जानकारी क्यों नहीं दी गई?
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बढ़े हुए बिलों की जवाबदेही कौन लेगा?
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और क्या पुलिस की मौजूदगी यह साबित नहीं करती कि विभाग खुद अपनी योजना पर भरोसा नहीं करता?
अगर स्मार्ट मीटर वाकई “स्मार्ट” हैं, तो उन्हें डंडे और डर के सहारे नहीं, बल्कि पारदर्शिता और विश्वास के साथ लागू किया जाना चाहिए।
अब देखना यह है कि बिजली विभाग और प्रशासन इस पूरे मामले पर जवाब देते हैं या हमेशा की तरह चुप्पी साध लेते हैं।
जबलपुर की जनता जवाब चाहती है — और वो भी अभी।