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हाईटेंशन लाइनों के नीचे बने निर्माणों पर सख्ती, प्रदेशभर में 3610 को नोटिस; भोपाल में 853 ढांचे चिन्हित



/भोपाल। मध्य प्रदेश में हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे और आसपास बने निर्माणों को लेकर प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर कार्रवाई तेज हो गई है। जबलपुर में प्रतिबंधित विद्युत गलियारे में निर्माण से जुड़े मामले में उच्च न्यायालय द्वारा अधिकारियों से जवाब मांगे जाने के बाद मध्य प्रदेश पावर ट्रांसमिशन कंपनी ने प्रदेशभर में ऐसे निर्माणों की पहचान और नोटिस की कार्रवाई बढ़ाई है।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक प्रदेश में 3610 निर्माणकर्ताओं को नोटिस दिए जाने की बात सामने आई है, जबकि भोपाल में तीन प्रमुख 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन कॉरिडोर के आसपास 853 निर्माणों को चिन्हित किए जाने का दावा है। इन आंकड़ों की विस्तृत अधिकृत सूची सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों में स्पष्ट रूप से नहीं मिली है, इसलिए इन्हें विभागीय/प्रकाशित दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी कार्रवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ में वर्ष 2026 के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति विनय सराफ की युगलपीठ ने जनहित एवं स्थानीय निकायों से जुड़े मामलों की सुनवाई की है।

हाईटेंशन लाइनों के आसपास निर्माण से जुड़े विवाद में ऊर्जा, नगरीय विकास और स्थानीय प्रशासन से स्थिति स्पष्ट करने की मांग किए जाने की बात सामने आई है। इसके बाद पावर ट्रांसमिशन कंपनी द्वारा मैदानी सर्वे और नोटिस की कार्रवाई तेज की गई है।

भोपाल के कई इलाके संवेदनशील

भोपाल में पहले भी 132 केवी ट्रांसमिशन लाइन के आसपास बने असुरक्षित निर्माणों पर कार्रवाई की जा चुकी है। नारियलखेड़ा-शारदा नगर क्षेत्र में अप्रैल 2025 में हादसे के बाद MP Transco ने कुछ अनधिकृत निर्माण हटाए थे और उस समय करीब 275 जोखिमपूर्ण निर्माण चिन्हित तथा लगभग 900 नोटिस जारी किए जाने की जानकारी दी गई थी।

गोविंदपुरा औद्योगिक क्षेत्र, करोंद, नारियलखेड़ा, देवकी नगर, बैरागढ़, आनंद नगर, जैन कॉलोनी और रतनपुर जैसे क्षेत्रों को पहले भी संवेदनशील माना गया है।

लाइन कॉरिडोर में निर्माण पर सुरक्षा का सवाल

ट्रांसमिशन लाइनों के नीचे और बहुत करीब निर्माण होने से करंट, इंडक्शन, स्पार्किंग और रखरखाव के दौरान गंभीर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है। भोपाल में अप्रैल 2025 में 132 केवी लाइन के पास शेड लगाने के दौरान दो लोगों के घायल होने की घटना के बाद कंपनी ने कार्रवाई की थी।

MP Transco ने 2026 में भोपाल की कुछ 132 केवी लाइनों को कालियासोत डैम के बैकवॉटर क्षेत्र से हटाकर नए मार्ग पर स्थानांतरित करने की परियोजना भी शुरू की, जिससे ट्रांसमिशन नेटवर्क की सुरक्षा और रखरखाव बेहतर किया जा सके।

दूरी के आंकड़ों पर सावधानी जरूरी

132 केवी और 220 केवी लाइनों के लिए 27 मीटर और 35 मीटर की दूरी संबंधी दावा अलग-अलग तकनीकी नियम, लाइन डिजाइन, राइट ऑफ वे और स्थानीय निर्माण नियमों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए इसे सार्वभौमिक वैधानिक दूरी के रूप में प्रकाशित करने से पहले संबंधित CEA/MP Transco के आधिकारिक मानक या न्यायालयीन रिकॉर्ड से पुष्टि करना बेहतर होगा।

हटाने से पहले होगी वैधानिक प्रक्रिया

चिन्हित निर्माणों पर आगे की कार्रवाई स्थानीय प्रशासन, नगर निगम और पावर ट्रांसमिशन कंपनी के समन्वय से की जा सकती है। नोटिस जारी होना अपने आप में तत्काल बेदखली या ध्वस्तीकरण का अंतिम आदेश नहीं होता। प्रत्येक मामले में स्वामित्व, निर्माण अनुमति, लाइन कॉरिडोर और लागू सुरक्षा नियमों की जांच के बाद ही वैधानिक कार्रवाई होगी।

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