गोल्डन चिकन पर फिर गरमाया विवाद: बदबू, गंदगी और कथित अतिक्रमण से रहवासी परेशान
बड़ी ओमती के लोगों ने प्रशासन को सौंपा शिकायत पत्र, नगर निगम की कार्रवाई पर भी उठाए गंभीर सवाल
जबलपुर। बड़ी ओमती के नया मोहल्ला क्षेत्र में संचालित बताए जा रहे गोल्डन चिकन सेंटर को लेकर एक बार फिर विवाद गहराता दिखाई दे रहा है। स्थानीय रहवासियों ने बदबू, गंदगी, कथित अतिक्रमण और मुर्गी कटिंग से निकलने वाले अपशिष्ट को लेकर प्रशासन के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत कर जांच एवं कार्रवाई की मांग की है।
रहवासियों का आरोप है कि मुर्गियों के पालन, परिवहन और कटिंग से निकलने वाले अपशिष्ट के कारण क्षेत्र में दुर्गंध फैल रही है और सार्वजनिक नालियों तथा सड़क की स्वच्छता प्रभावित हो रही है।
📄 शिकायत में क्या कहा गया?
शिकायत पत्र में प्लॉट नंबर 877 के आसपास, नया मोहल्ला, बड़ी ओमती क्षेत्र में मुर्गी पालन का कारोबार संचालित किए जाने की बात कही गई है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बड़ी संख्या में मुर्गियां यहां लाई जाती हैं और उनसे निकलने वाली बीट तथा अन्य अपशिष्ट सामग्री सार्वजनिक नाली में बहाई जाती है।
🤢 100 से 200 मीटर तक दुर्गंध फैलने का आरोप
रहवासियों का कहना है कि मुर्गियों के अपशिष्ट और कथित तौर पर खुले में होने वाली सफाई के कारण आसपास के करीब 100 से 200 मीटर क्षेत्र तक बदबू महसूस होती है। लोगों का आरोप है कि इससे घरों, दुकानों और सड़क से गुजरने वाले नागरिकों को परेशानी हो रही है।
शिकायतकर्ताओं ने कीड़े-मकौड़ों और मच्छरों के बढ़ने की आशंका भी जताई है और प्रशासन से स्वच्छता एवं अपशिष्ट निपटान व्यवस्था की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुर्गियों से भरे बड़े वाहन सड़क पर खड़े किए जाते हैं, जिससे यातायात प्रभावित होता है। शिकायत में सड़क पर कथित रूप से मुर्गियों की सफाई और उससे गंदगी फैलने का भी उल्लेख किया गया है।
🏫 स्कूल-मदरसे और होटलों के बीच कारोबार, बच्चों की सेहत को लेकर चिंता
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक संबंधित स्थान के आसपास स्कूल, मदरसा, लॉज और खाने-पीने के प्रतिष्ठान भी हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों ने सवाल उठाया है कि आबादी वाले क्षेत्र में इस प्रकार के कारोबार के संचालन के लिए निर्धारित स्वच्छता, स्वास्थ्य और अनुमति संबंधी नियमों का पालन हो रहा है या नहीं।
रहवासियों ने प्रशासन से मुर्गियों की स्थिति, साफ-सफाई, अपशिष्ट निपटान और संबंधित कारोबार की अनुमति की जांच कराने की मांग की है। पक्षियों से जुड़ी बीमारियों के संभावित जोखिम को देखते हुए उनका कहना है कि स्वास्थ्य संबंधी मानकों का निरीक्षण भी जरूरी है।
🎥 मृत मुर्गियों से जुड़ा वीडियो भी पहले बन चुका है विवाद का कारण
गोल्डन चिकन को लेकर इससे पहले भी विवाद सामने आया था। कुछ दिन पूर्व कथित रूप से एक वीडियो प्रसारित होने के बाद बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी। कार्यकर्ताओं की ओर से मृत मुर्गियों को प्रतिष्ठान परिसर में लाने और उन्हें खाद्य उपयोग में लिए जाने जैसे आरोप लगाए गए थे।
⚡ कार्रवाई हुई तो सवाल उठा—छोटे ठेले हटे, बड़े कारोबार पर क्या हुआ?
रहवासियों का कहना है कि शिकायत के बाद नगर निगम की टीम क्षेत्र में पहुंची थी, लेकिन कार्रवाई सड़क किनारे छोटी दुकानों और ठेलों को हटाने तक सीमित दिखाई दी। इसी को लेकर स्थानीय लोगों ने निगम की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं।
यदि सड़क पर अतिक्रमण हटाया गया तो मुर्गियों से भरे बड़े वाहनों की पार्किंग की जांच क्यों नहीं हुई?
कथित रूप से सड़क और नालियों में फैल रहे अपशिष्ट की जांच क्यों नहीं की गई?
यदि नियम सभी के लिए समान हैं तो कार्रवाई में समान सख्ती दिखाई क्यों नहीं दे रही?
🔎 क्या रसूख कार्रवाई पर भारी? आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी
कुछ स्थानीय लोगों ने कार्रवाई में कथित पक्षपात और प्रभावशाली लोगों को संरक्षण मिलने जैसे सवाल भी उठाए हैं। कुछ शिकायतकर्ताओं ने आर्थिक मिलीभगत की आशंका तक जताई है।
हालांकि किसी अधिकारी द्वारा रिश्वत लेने या आर्थिक मिलीभगत किए जाने की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में इन आरोपों को तथ्य मानने के बजाय निष्पक्ष विभागीय जांच के जरिए वास्तविक स्थिति स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
📌 शिकायतकर्ताओं की प्रमुख मांगें
✔️ कारोबार की वैध अनुमति और लाइसेंस की जांच हो।
✔️ मुर्गी पालन एवं कटिंग स्थल की स्वच्छता जांच हो।
✔️ अपशिष्ट निपटान और नाली में गंदगी बहाने के आरोपों की जांच हो।
✔️ सड़क पर खड़े वाहनों और कथित अतिक्रमण पर कार्रवाई हो।
✔️ स्वास्थ्य विभाग मौके पर निरीक्षण करे।
✔️ यदि किसी स्तर पर लापरवाही या संरक्षण पाया जाए तो जिम्मेदारी तय की जाए।
बड़े कारोबार की कथित अव्यवस्था क्यों नहीं?
अब निगाहें नगर निगम, स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन पर हैं। जरूरत महज औपचारिक निरीक्षण की नहीं, बल्कि अनुमति, स्वच्छता, अपशिष्ट निपटान, वाहन पार्किंग और कथित अतिक्रमण समेत हर बिंदु की पारदर्शी जांच की है।
यदि नियम बने हैं तो उनका पालन भी बिना भेदभाव होना चाहिए। शिकायतों में तथ्य पाए जाते हैं तो कार्रवाई होनी चाहिए और यदि आरोप गलत हैं तो प्रशासन को स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।
