देश, प्रदेश, जिला, संभाग, तहसील, जिला और ग्राम स्तर पर संवाददाता चाहिए — संपर्क करें  |  डायरेक्टर, एडिटर इन चीफमोहम्मद असफाक आरिफ  |  शॉप - 1 दारुल उलूम मार्किट, मंडी मदार टेकरी, जबलपुर मध्य प्रदेश 482002  |  संपर्क: 9893230986

हिमालय क्षेत्र में विकास की सोच को बदलना होगा-सिन्हा


जबलपुर | हिमालय दुनिया की सबसे नई और अस्थिर पर्वत श्रृंखला है। यहां भूकंप, भूस्खलन और हिमनद पिघलने की घटनाएं आपस में जुड़ी हुई हैं। 26 अगस्त 2026 को नेपाल-तिब्बत सीमा पर हुई ग्लेशियर जनित तबाही में जलवायु परिवर्तन एक मुख्य कारक है। जलवायु परिवर्तन, बढता तापमान और बदलता मानसून ने हिमालयी भू-तंत्र को अस्थिर करने वाली परिस्थितियां पैदा या मजबूत की है, जबकि तत्काल ट्रिगर ग्लेशियर का टूटना या बर्फ-चट्टान का हिमस्खलन और उसके बाद मलबे का बहाव था। बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राजकुमार सिन्हा ने बताया कि जलवायु परिवर्तन जरूरी नहीं है कि हर बार सीधे “बाढ़” पैदा करे। वह पहले जोखिम की पूरी संरचना बदलता है। 26 अगस्त को नेपाल के रसुवा क्षेत्र में ल्हेन्दे खोला नदी के ऊपरी हिस्से में ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा लगभग 5,200 मीटर की ऊंचाई से करीब 1,200 मीटर नीचे गिरा। इसके साथ बर्फ, चट्टान और मलबा आया और उसने नदी में अचानक अत्यंत शक्तिशाली प्रवाह पैदा किया | जलवायु परिवर्तन को रोकने के वैश्विक प्रयासों के साथ-साथ हिमालय में विकास की सोच बदलना ही इस संकट का वास्तविक समाधान है। प्रकृति को चुनौती देकर बनाया गया विकास अंततः मानव सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा बन सकता है।

Post a Comment

Previous Post Next Post
askari times
askari times