जबलपुर। जितेंद्र गुप्ता द्वारा स्टार हेल्थ से 2015 में स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी फैमिली हेल्थ ऑप्टिमा प्लान क्रय किया गया था जिसे परिवादी निरंतर नवीनीकरण करता आ रहा था, परंतु 4 फरवरी 2023 को परिवादी को सांस लेने में अत्यधिक कठिनाई होने पर जांच के लिए जब परिवादी हॉस्पिटल जा रहा था। इस दौरान वह बेहोश हो गया तो उसके भाई ने उसे अपेक्स अस्पताल में जाकर भर्ती कराया और परिवार जनों ने 24 घंटे के भीतर दावे की सूचना बीमा कंपनी को दे दी। जब बाद में परिवादी को पता चला कि उसका दावा निरस्त कर दिया गया है जिस पर 17 मार्च 2023 को अपनी शिकायत को विस्तार से बताते हुए परिवादी ने बीमा कंपनी को शिकायत की। तब बीमा कंपनी ने यह कहकर दावा निरस्त कर दिया कि आपने जिस अस्पताल से उपचार कराया है वह ब्लैकलिस्टेड है। तब परिवादी ने बीमा कंपनी को दिनांक 14 जून 2023 को अपने अधिवक्ता के द्वारा विधिक नोटिस प्रेषित किया। लेकिन उस पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई। जिससे परिवादी को आर्थिक एवं मानसिक कष्ट सहना पड़ा एवं उपचार में व्यय राशि ₹50,836/- दिये जाने की प्रार्थना की। परंतु बीमा कंपनी ने नोटिस के जवाब में यह कह दिया कि अस्पताल ब्लैकलिस्टेड होने के कारण हम आपको आपके दावे की राशि नहीं दे पाएंगे। उक्त नोटिस के जवाब से व्यथित होकर परिवादी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग के समक्ष एक परिवाद प्रस्तुत किया। जिसमें सभी दस्तावेज प्रदर्शित किए तब परिवादी के अधिवक्ता द्वारा तर्क किया गया कि आपातकालीन स्थिति में किसी भी अस्पताल से उपचार लिया जा सकता है जब तक मरीज स्टेबल कंडीशन में ना आ जाए जिस पर बीमा कंपनी ने यह निवेदन किया की पॉलिसी के अधीन बीमा कंपनी की देयता है तो उक्त स्थिति में बीमा कंपनी को पॉलिसी की शर्तों के अनुसार कटौती उपरांत गणना करने की अनुमति प्रदान की जाए। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग क्रमांक 2 के द्वारा यह व्यक्त किया गया कि बीमा कंपनी का निवेदन स्वीकार योग्य नहीं है क्योंकि उपरोक्त स्थिति में बीमा कंपनी के दावा निराकरण से असंतुष्ट होने पर परिवादी को पुनः आयोग के समक्ष परिवाद प्रस्तुत करने हेतु विवश होना पड़ेगा जिससे निश्चित रूप से परिवादी को उसकी दावा राशि का भुगतान प्राप्त करने में विलंब होगा और न्याय का उद्देश्य विफल होगा ऐसी स्थिति में बीमा कंपनी का उक्त निवेदन अस्वीकार किया जाता है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग द्वारा यह प्रमाणित किया गया कि बीमा कंपनी पर बीमा पॉलिसी के अधीन दावा की गई राशि के भुगतान का दायित्व था परंतु उसके द्वारा बिना किसी उचित आधार के परिवादी का बीमा दावा निरस्त किया गया है जो कि परिवादी के प्रति सेवा में कमी की श्रेणी में आता है । अतः परिवादी द्वारा प्रस्तुत परिवाद स्वीकार करते हुए आदेशित किया गया है कि बीमा कंपनी परिवादी को उसके उपचार में व्यय की गई राशि ₹50,836/- रुपए दावा निरस्तीकरण 1 मार्च 2023 से अदायगी दिनांक तक 07% वार्षिक दर से ब्याज सहित भुगतान करें। बीमा कंपनी परिवादी को मानसिक कष्ट हेतु ₹5000/- एवं परिवाद व्यय हेतु ₹2000/- की राशि का भुगतान करें उक्त समस्त आदेशित राशियों का भुगतान आदेश दिनांक से 45 दिवस में करने का आदेश पारित किया गया। प्रकरण में अधिवक्ता शिवम गुप्ता द्वारा पैरवी की गई l
