"या हुसैन" की सदाओं के बीच अकीदत से संपन्न हुआ मुहर्रम,



कौमी एकता की मिसाल बने जुलूस

अनवरगंज में भी मोहर्रम के 10 दिन लंगर और मजलिस का आयोजन रहा 

जबलपुर। पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मुहम्मद (सल्ल.) के नवासे, हजरत इमाम हुसैन अली मुकाम की शहादत की याद में मनाया जाने वाला मुहर्रम शुक्रवार को अकीदत, एहतराम और कौमी एकता के माहौल में संपन्न हुआ। शहरभर से निकले ताजियों और सवारियों के जुलूस रानीताल कर्बला पहुंचकर परंपरानुसार ठंडे किए गए। पूरे मार्ग में "या हुसैन" और "या अली" की सदाएं गूंजती रहीं, जबकि हजारों जायरीन ने नम आंखों से ताजियों और सवारियों की जियारत कर उन्हें विदाई दी।


हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी मुहर्रम के जुलूस ने सांप्रदायिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल पेश की। हिंदू और मुस्लिम मुजावरों की सवारियां एक साथ जुलूस में शामिल हुईं। बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोगों ने भी सवारियां रखीं, लंगर वितरित किए तथा जुलूस की व्यवस्था और स्वागत में सहयोग दिया। शासन-प्रशासन ने सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए। संवेदनशील मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात रहा तथा अस्थायी पुलिस चौकियां स्थापित की गईं।


मुख्य जुलूस में लगभग 300 सवारियां और 70 छोटे-बड़े ताजिए शामिल हुए। बड़ी संख्या में वाहनों से लंगर-ए-इमाम हुसैन का वितरण किया गया। जुलूस मुस्लिम बहुल क्षेत्रों से निकलकर बहोरा बाग, चार खंभा, मछली मार्केट, मिलौनीगंज, कोतवाली, कमानिया और बड़ा फुहारा होते हुए रानीताल कर्बला पहुंचा। पूरे मार्ग में जायरीन ताजियों और सवारियों की जियारत करते रहे।


आकर्षण का केंद्र रहे भव्य ताजिए और सवारियां

मुहर्रम के जुलूस में कई आकर्षक और पारंपरिक ताजिए शामिल हुए। हजरत सूफी गुल बाबा अशरफी द्वारा कायम मन्नत वाला ताजिया, सुलेमानी मस्जिद का ताजिया, चांदनी चौक का ताजिया तथा बहोरा बाग का ताजिया विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। कंधों पर ताजिए उठाए अकीदतमंद "या अली" और "या हुसैन" के नारों के साथ आगे बढ़ते रहे।

श्रद्धालु अपने बच्चों को ताजियों के नीचे से निकालते नजर आए। विभिन्न आकार-प्रकार की सवारियां भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। बाबा साहब की आमद पर भारी भीड़ उमड़ी। हाथों में मोरछल लिए चल रहे बाबा साहब के दीदार के लिए श्रद्धालुओं का हुजूम उमड़ पड़ा। कई सवारियों पर चांदी के छत्र सुशोभित थे, जबकि मखानों से निर्मित विशाल सवारियां अपनी भव्यता और सुंदर कारीगरी से सभी का ध्यान आकर्षित कर रही थीं।


खानकाह अमीरे मिल्लत मंडी मदार टेकरी में अशर्फी ग्रुप के द्वारा लंगर वितरण की रही व्यापक व्यवस्था

जुलूस के दौरान शहरभर में जगह-जगह लंगर का आयोजन किया गया। बड़ी संख्या में वाहन भी लंगर वितरण के लिए शामिल रहे। एक ओर ताजियों और सवारियों का जुलूस रानीताल कर्बला की ओर बढ़ रहा था तो दूसरी ओर लंगर वितरण करने वाले वाहन रानीताल ईदगाह क्षेत्र की ओर जाकर लोगों की सेवा में जुटे रहे।


सदर में निकला भव्य जुलूस

सदर क्षेत्र में शाम 4 बजे के बाद परंपरागत जुलूस निकाला गया। इसमें गली नंबर-9 का पंचायती ताजिया, सिकंदर बाबा की सवारी, सारवट सवारी, बूचड़ी, नाले हैदर बशीर होटल की सवारी, अकील बाबा की सवारी तथा चांदी की सवारी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं।

जुलूस का नेतृत्व समाजसेवी मोहम्मद अकबर खान सरवर, इनायत अली शाह, नासिर बाबा सिकंदर बाबा तथा सिममा बाबा ने किया। समाजसेवी अकबर खान सरवर के अनुसार इस वर्ष 40 से अधिक सवारियां और 10 ताजिए शामिल हुए। जुलूस अपने पारंपरिक मार्गों से होता हुआ रानीताल कर्बला पहुंचा।

रांझी में भी उमड़ी अकीदतमंदों की भीड़

रांझी क्षेत्र के जुलूस में अन्ना बाबा, राकेश बाबा तथा दरबार ए पहलवान गांधी व्यायामशाला की सवारी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। पूरे मार्ग में अकीदतमंदों की भारी भीड़ मौजूद रही।


गढ़ा में कौमी एकता की अनूठी मिसाल

उपनगरीय क्षेत्र गढ़ा का परंपरागत जुलूस भी शाम को निकाला गया। समाजसेवी सूफी मुबारक कादरी एवं नियाज मंसूरी के अनुसार जुलूस में 50 से अधिक हिंदू-मुस्लिम मुजावरों की सवारियां और 12 ताजिए शामिल हुए।

गढ़ा के जुलूस में डॉ. सैय्यद मकबूल अली कादरी, सूफी निजाम बाबा, खलीफा मुमताज मंसूरी तथा दादा दरबार की सवारी विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जुलूस मार्ग पर अनेक हिंदू धर्मावलंबियों ने लंगर वितरित कर बाबा साहब का इस्तकबाल किया। गढ़ा बाजार कौमी एकता मुर्तजा कमेटी के मुईन उस्मानी ने प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी जुलूस का स्वागत किया।

गढ़ा बाजार और त्रिपुरी चौक होते हुए जुलूस सुपाताल कर्बला पहुंचा, जहां  सैय्यद कादिर अली कादरी, वासित कादरी, खलीफा इनायत अली कादरी तथा जवाहर कादरी ने इमाम हुसैन अली मुकाम की बारगाह में सलातो-सलाम पेश कर जुलूस का समापन कराया। पूरे आयोजन के दौरान अकीदत, अनुशासन, भाईचारे और कौमी एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

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