इस्लाम के मायने अमन है : मौलाना बरकात अहमद कादरी

 



जबलपुर।

आनंद नगर स्थित शराफ़ाबाद में खानकाह-ए-औलिया रब्बानिया, मखदूम-ए-मिल्लत हज़रत मौलाना सैय्यद वजूदुल कादरी रब्बानी रहमतुल्लाह अलैह के उर्स के मौके पर जुमे के दिन अकीदत और मुहब्बत के साथ चादर जुलूस निकाला गया! रात्री में जलसे का आयोजन किया गया। इस अवसर पर ऑल इंडिया सुन्नी जमीयतुल उलमा के सरपरस्त हज़रत अल्लामा अल्हाज सैय्यद बरकात अहमद कादरी कौसर रब्बानी ने अपनी तक़रीर में कहा कि इस्लाम के मायने अमन के हैं! इस्लाम में कहा गया है कि अगर तुम्हारा पड़ोसी किसी भी धर्म का हो उसका खयाल रखो और उसके हुकूक अदा करो!

उन्होंने कहा कि हज़रत सुल्तानुल वाइजीन ने अपनी पूरी ज़िंदगी दीन और मिल्लत की ख़िदमत में गुज़ारी। आज भी अकीदतमंद मखदूम-ए-मिल्लत के रूहानी फ़ैज़ान से फ़ैज़याब हो रहे हैं। मौलाना साहब ने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे अच्छी तालीम हासिल करें और मुल्क की तरक़्क़ी व ख़ुशहाली में अपना योगदान दें।

जलसे में हज़रत अख़्तर रज़ा सुल्तानी एवं हज़रत मौलाना चांद कादरी ने भी नूरानी तक़रीर पेश की। कार्यक्रम की क़यादत सूफ़ी सैय्यद सिफ़ात अहमद रब्बानी, हज़रत अल्हाज सैय्यद शम्स रब्बानी, पीरज़ादा सैय्यद मोहम्मद नूरी कादरी रब्बानी तथा पीरज़ादा क़ारी सैय्यद अहमद जिलानी कादरी रब्बानी ने फ़रमाई।

इस मौके पर सैय्यद मोहम्मद समदानी, सैय्यद फरहान रब्बानी बांदा, सैय्यद रिहान रब्बानी, अल्हाज वहीद मास्टरन साहब ने नात शरीफ़ और मनक़बत-ए-पाक पेश की। अंत में सलातो-सलाम और दुआ-ए-ख़ैर के साथ उर्स का समापन हुआ।

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